भास्कर न्यूज| बारां जिले में आर्द्र भूमि दिवस सोमवार को मनाया जाएगा। यह सुखद तस्वीर है कि प्रदेश में अधिसूचित 55 वेटलैंड में से सबसे ज्यादा 12 बारां में ही हैं। लेकिन तीन साल पहले वेटलैंड के नोटिफाई होने के बाद भी इनके संरक्षण की दिशा में प्रयास नहीं हो पाए। वेटलैंड के प्रभावी संरक्षण और संवर्धन हो तो बारां जिले में प्रवासी पक्षियों की आवक और इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जिले में वेटलैंड संरक्षण और संवर्धन को लेकर फिलहाल व्यापक प्रयास नहीं किए गए हैं। अतिक्रमण, जलभराव के प्राकृतिक रास्ते अवरुद्ध होने, गंदे पानी की आवक और प्रशासनिक उदासीनता के कारण जिले के कई वेटलैंड तेजी से सिमटते जा रहे हैं। नोटिफाई होने के बाद भी इनमें से कई में से खेती के लिए जलदोहन होता है। इसके कारण पूरे साल पानी का भराव नहीं रह पाता है। वेटलैंड न केवल भू-जल रिचार्ज का प्रमुख स्रोत हैं, बल्कि प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास है। ऐसे में अगर यहां पर विकास कार्य के साथ नियमों की पालना सुनिश्चित की जाए तो यहां पर्यटन के साथ ही विदेशी-देशी पक्षियों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। जिले में काफी प्रकार के वेटलैंड है। जिले में हर साल बड़ी संख्या में विदेशी प्रवासी पक्षी पहुंचते है। इनमें सारस, यूरेशियन स्पून बिल, पेंटेड स्टॉर्क, ग्रे हेरॉन, वुड सैंडपाइपर, ब्रॉन्ज विंग्ड जैकाना आदि शामिल है। शेरगढ़ में वेटलैंड को विकसित करके मानवीय दखल को रोका गया है। इसके कारण यहां पर प्रवासी पक्षी बडी संख्या में पहुंचते है। बारां जिले में मौजूद वेटलैंड को अभी विकसित नहीं किया है। यहां पर मानवीय दखल काफी ज्यादा है। पिछले दिनों सोरसन और रामगढ़ में भी पिछले सालों के मुकाबले प्रवासी पक्षियों की संख्या कम रही है। इससे बारां जिले में ईको-टूरिज्म में भी बढ़ोतरी होगी और प्रवासी पक्षियों को भी प्राकृतिक आवास मिल सकेगा। उदयपुर में हर साल पक्षी मेला लगता। ऐसा प्रयास बारां जिले में भी किया जा सकता है। रविंद्र तोमर, पूर्व वन्यजीव मानद प्रतिपालक प्रदेश के 55 में से 12 नोटिफाइड वेटलैंड बारां में वन विभाग के अनुसार राज्य के 24 जिलों में कुल 55 वेटलैंड है। इनमें सबसे ज्यादा 12 नोटिफाई वेटलैंड बारां जिले में है। जिनमें इकलेरा सागर, कोटरापार तालाब, बैथली डेम, हिंगलोट डेम, उतावली डेम, सहरोल तालाब, गरड़ा तालाब, नियाना तलाई, नाहरगढ़, तेजाजी की तलाई, पुष्कर तालाब एवं ल्हासी डेम शामिल हैं। हाड़ौती में भी कोटा में 2, झालावाड़ व बूंदी में 1-1 नोटिफाई वेटलैंड है। वेटलैंड में नहीं हो सकता खनन और कंस्ट्रक्शन वेटलैंड जोन में आने वाले एरिया में ना तो कोई माइनिंग और ना ही कोई कंस्ट्रक्शन का कार्य हो सकेगा। अगर उसके आसपास कोई पहले से इंडस्ट्री स्थापित है तो वह अपने इंडस्ट्री की कैपेसिटी को नहीं बढ़ा पाएगा। वेटलैंड एरिया के आसपास कोई किसी भी तरह का डस्ट, बायो मेडिकल प्रोडक्ट नहीं फेंक पाएगा। इसके पानी को हमेशा साफ-सुथरा ही रखना होगा। बारिश के दिनों तालाब जहां तक भरा होगा, उसके 50 मीटर की दूरी तक माइनिंग नहीं की जाएगी। ^जिले के नोटिफाई वेटलैंड में मानवीय दखल को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए यहां पर तार फेंसिंग समेत आदि कार्य करवाए गए है। साथ ही इन वेटलैंड पर नियमानुसार कार्य करवाया जा रहा है। आगामी दिनों में इन्हे विकसित करके ईको-टूरिज्म बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। – विवेकानंद मानिकराव बड़े, डीएफओ बारां


