बिलासपुर नगर निगम के सरकारी भवनों पर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट अटक गया है। सीएसईबी के 150 करोड़ रुपये के बकाया बिल के कारण कंपनी ने सिंक्रोनाइजेशन से मना कर दिया है। बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने नगर निगम की बिल्डिंगों की छत पर सोलर पैनल लगाने के बाद जब सीएसईबी से मीटर लगाने के लिए पत्र लिखा तो कंपनी ने यह कहकर इनकार कर दिया कि पहले वह अपने बकाया बिलों का भुगतान करे। नगर निगम के कमिश्नर और स्मार्ट सिटी के एमडी अमित कुमार ने ‘दैनिक भास्कर ’को बताया कि नगर निगम को जो बिजली बिल मिल रहे हैं, उसमें कई विसंगतियां हैं, इसलिए एनर्जी ऑडिट का सहारा लिया गया। इसमें कई मीटर बंद पाए गए, उसके भी बिल भेज दिए गए। बतादें कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने सितंबर 2023 में 5.85 करोड़ रुपये की यह योजना शुरू की थी। इसके तहत 14 सरकारी भवनों की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जाने थे। लाखों की बचत का दावा नगर निगम कमिश्नर का कहना है कि निगम की सभी बिल्डिंगों में सोलर पैनल से बिजली उत्पादन शुरू हो जाए तो लाखों की बचत होगी। अभी जिन जगहों पर बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है, उसके बिलों में अंतर आ गया है। उन्होंने कहा कि एनर्जी ऑडिट में जिन जगहों के 250 मीटर बंद पाए गए थे, उनमें से अधिकांश लगाए जा चुके हैं और अन्य समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। 5.85 करोड़ की योजना बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने सितंबर 2023 में मेसर्स गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर एंड जिन्साल इंजीनियरिंग को 5.85 करोड़ का ठेका दिया था। कंपनी को 14 सरकारी भवनों की छत पर रूप टाप सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन करना था। लक्ष्य था कि सरकारी कार्यालयों में उपयोग के लायक बिजली उत्पादित की जाए ताकि बचत हो सके। हर महीने 2.91 लाख की बचत का दावा निगम का दावा है कि सभी 14 भवनों की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाकर 748 किलोवाट प्रति घंटे बिजली उत्पादन किया जाएगा। इस प्रकार औसतन हर महीने 2.91 लाख और 35 लाख रुपये सालाना बिजली की बचत होगी। इन स्थानों पर लगाए गए सोलर पैनल और उनकी स्थिति नगर में विभिन्न भवनों पर 419 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनमें से कुछ स्थानों पर बिजली उत्पादन शुरू हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर यह अभी शुरू नहीं हुआ है। इन स्थानों पर लगाए गए सोलर पैनल


