बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखते तालाबों और लुप्त होती नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की गई है। निवाड़ी जिले के ऐतिहासिक ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर से जल सहेलियों ने 300 किलोमीटर की पदयात्रा आरंभ की है, जो जटाशंकर धाम तक जाएगी। यह 19 दिवसीय यात्रा बुंदेलखंड के प्राचीन चंदेल-कालीन तालाबों के जीर्णोद्धार और जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का अहम प्रयास है। यात्रा का मार्ग ओरछा से शुरू होकर बबीना, तालबेट, मोहनगढ़, टीकमगढ़ और छतरपुर के बड़ा मलहरा होते हुए जटाशंकर धाम तक जाएगा। इस दौरान जल सहेलियों के साथ स्थानीय समाजसेवी, पर्यावरणविद् और आम नागरिक भी जुड़ रहे हैं। जल सहेलियों का मानना है कि जल संकट से निपटने के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा। यात्रा के दौरान मार्ग में पड़ने वाले हर गांव और कस्बे में लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। प्रशासन ने यात्रा की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। मार्ग में पुलिस बल तैनात किया गया है और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। यह पदयात्रा 20 फरवरी को जटाशंकर धाम में समाप्त होगी, लेकिन जल संरक्षण का यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। यह पहल न केवल जल संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप धारण कर रही है।


