बुरहानपुर की 8 रेंज में वन्यप्राणियों की काउंटिंग:6 दिन में मांसाहारी-शाकाहारी दोनों की गिनती; पहले 3 दिन बाघ, तेंदुआ और लकड़बग्घा पर नजर

बुरहानपुर जिले की सभी आठ रेंजों में गुरुवार यानी 18 दिसंबर से वन्यप्राणी गणना शुरू हो गई है। जंगलों में टीमें पैदल घूमकर जानवरों की मौजूदगी के सबूत जुटा रही हैं। यह प्रक्रिया छह दिन तक चलेगी। पहले तीन दिन मांसाहारी और अगले तीन दिन शाकाहारी वन्यप्राणियों की गिनती की जाएगी। सभी रेंजों में फील्ड वर्क शुरू हो चुका है। यह गणना छठवीं अखिल भारतीय बाघ गणना का हिस्सा है। इससे पहले वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। उन्हें जंगल में चलने के तरीके, ट्रांजेक्ट लाइन पर मॉक एक्सरसाइज और एम-स्ट्राइप ऐप के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। बुरहानपुर की इन 8 रेंजों में चल रही काउंटिंग जिले की बुरहानपुर, खकनार, बोदरली, शाहपुर, नेपानगर, असीरगढ़, धूलकोट और नावरा रेंज में यह गणना की जा रही है। वन विभाग हर चार साल में एक बार इस तरह की व्यापक गणना करता है। पहले तीन दिन बाघ, तेंदुआ और लकड़बग्घा पर नजर नेपानगर एसडीओ विक्रम सुलिया के अनुसार, 18 दिसंबर से शुरू हुई गणना के पहले तीन दिन बाघ, तेंदुआ, भेड़िया, सियार और लकड़बग्घा जैसे मांसाहारी वन्यप्राणियों पर फोकस किया जा रहा है। पगमार्क, खरोंच और शिकार के अवशेष बने पहचान का आधार टीमें रोज करीब 5 किलोमीटर के इलाके में जंगल की जमीन खंगाल रही हैं। पगमार्क, पेड़ों पर खरोंच के निशान और शिकार के अवशेषों को दर्ज किया जा रहा है। इन्हीं संकेतों से यह तय किया जाता है कि किस इलाके में कौन सा वन्यप्राणी सक्रिय है। मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना पूरी होने के बाद अगले तीन दिन नीलगाय, चीतल, सांभर और चिंकारा जैसे शाकाहारी वन्यप्राणियों की गिनती की जाएगी। एसडीओ ने बताया कि पूरी प्रक्रिया एम-स्ट्राइप मोबाइल ऐप के जरिए की जा रही है। सुरक्षा कारणों से वन विभाग वन्यप्राणियों से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता है।

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