भास्कर एक्सक्लूिसव बोकारो होकर चलने वाली कुछ ट्रेनों से जनरल बोगी कम कर दिए गए हैं। इसके कारण गरीब तबके के मजदूरों व मध्यम वर्ग के यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोविड के समय भीड़ को देखते हुए ट्रेनों में जनरल बागी की संख्या कम कर दी गई थी। 2021 से 2026 के दौरान भारतीय रेलवे ने अपनी परिचालन नीति में बदलाव करते हुए कई एक्सप्रेस ट्रेनों के कोच में फेरबदल किया है। बोकारो से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में रेलवे ने पिछले कुछ वर्षों में एलएचवी रैक को बढ़ावा दिया है। कई ट्रेनों में जनरल बोगी की संख्या को कम करके उनकी जगह एसी-3 इकोनॉमी या अन्य आरक्षित डिब्बे जोड़े गए थे। जबकि पुरी से आनंद बिहार के बीच चलने वाली सभी ट्रेनों में जनरल बोगी में यात्रियों की काफी भीड़ होती है। सभी ट्रेनों में आवश्यकता से अधिक भीड़ होने के कारण गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग के यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें अधिक पैसे खर्च कर रिजर्वेशन करवाना पड़ रहा है। ट्रेन जहां से खुलती है, वहीं से बोगी का निर्धारण करता है रेल प्रबंधन प्रमुख ट्रेनों में कम कर दी गई बोगी पुरुषोत्तम एक्सप्रेस : इस ट्रेन में 2 जनरल कोच हैं। जबकि इस ट्रेन में पहले चार बोगी हुआ करती थी। दो जनरल बोगी घटने से भीड़ आवश्यकता से अधिक हो रही है। फलस्वरूप कई यात्रियों को ट्रेन छूटने की स्थिति में स्लीपर में चढ़ना पड़ता है। विदित हो कि पूर्व में लंबी दूरी की ऐसी ट्रेनों में जनरल डिब्बों की संख्या अधिक हुआ करती थी, लेकिन अब सीमित कर दी गई है। नीलांचल एक्सप्रेस : इस ट्रेन में भी कोच परिवर्तन के बाद से स्लीपर और जनरल बोगी की संख्या कम कर दी गई है। इसकी वजह से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। रांची-आनंद बिहार झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस: इस ट्रेन में पांच वर्ष पहले छह जनरल बोगी होती थी। अब बोगी कम कर दिए जाने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। बोकारो-हावड़ा एक्सप्रेस : इस ट्रेन में 2 से 3 जनरल कोच होते हैं। पहले इस ट्रेन में छह जनरल बोगी होती थी, अब इसमें स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा दी गई है। कोसी सुपर एक्सप्रेस: हटिया से पूर्णिया कोर्ट के बीच चलने वाली इस ट्रेन में 5 जनरल जनरल कोच हैं। पहले इसमें 06 जनरल कोच होते हैं। यह बोकारो से होकर गुजरती है।


