बोले विशेषज्ञ- भारतीय ज्ञान का लक्ष्य लोकल फॉर वोकल से ही

रांची यूनिवर्सिटी, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी समेत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के सिलेबस के अनुसार पढ़ाई हो रही है। एनईपी के क्रियान्वयन और भारतीय ज्ञान परंपरा विषय में गुरुवार को राजभवन में परिचर्चा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार कर रहे थे। विशेषज्ञ के तौर पर संस्कृति उत्थान न्यास के अतुल कोठारी व उनकी टीम थी। संबंधित विषय पर 10 विवि कुलपतियों ने 5-5 मिनट का प्रेजेंटेशन दिया। परिचर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कुलपतियों से कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लोकल फॉर वोकल जरूरी है। झारखंड के ग्रामिणों-आदिवासियों के पास बहुत ऐसी जानकारियां हैं, जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। इसमें विश्वविद्यालय अहम भूमिका निभा सकता है। राज्यपाल के प्रधान सचिव नीति मदन कुलकर्णी ने कहा कि सभी विवि एनईपी लागू करने को लेकर आपस में संवाद करते रहें। इस अवसर रांची विवि के वीसी डॉ अजीज कुमार सिन्हा, डीएसपीएमयू के वीसी डॉ. तपन कुमार शांडिल्य, जेयूटी के वीसी डॉ. डीके सिंह, सरला बिरला विवि समेत अन्य निजी व सरकारी विवि कुलपति थे। गवर्नर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत की प्रकृति, संस्कृति, भाषाई विविधता और विकास-यात्रा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। राज्य को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने के लिए सहभागिता जरूरी कुलपतियों के साथ बैठक में उपस्थित राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि राज्य को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने के लिए सभी का सहभागिता जरुरी है। भारत कभी संपूर्ण विश्व के लिए शिक्षा का प्रमुख केन्द्र हुआ करता था। भारतीय ज्ञान परंपरा ने सदियों से न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को प्रोत्साहित किया है। सभी विश्वविद्यालय के वीसी ने कि एनईपी लागू करने को किए जा प्रयासों की जानकारी दी। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ डिग्री प्राप्त करना नहीं राज्यपाल ने सभी विवि के कुलपतियों से कहा कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन हेतु प्रभावी टास्क फोर्स का गठन करें और नियमित समीक्षा बैठकें करें। इससे संबंधित वर्कशॉप और सेमिनार का आयोजन करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान, व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण है।

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