भास्कर न्यूज | अमृतसर गोस्वामी तुलसीदास मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा में व्यास गद्दी पर विराजमान भाई नरेश शर्मा ने कई प्रसंग सुनाए। व्यास गद्दी पर बैठने से पहले नरेश शर्मा ने सारी संगत को नमन किया। उन्होंने कहा कि भक्तों में भगवान का वास होता है। डा. रवि अरोड़ा, विनय खन्ना, धर्मपाल, गौरव गुलाटी और संगत के सहयोग से चल रही कथा को सुनने कई भक्त पहुंचे। कथा में पंडित ने कहा कि जब तक हमारे जीवन में मूर्ति का भाव है, तब तक हरि कहां से प्रकट होंगे। हरि को प्रकट करने के लिए मन में भावों का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नारद जी ने जिज्ञासा प्रकट की कि कौन-कौन से लोग कथा श्रवण करने से भव सागर से तर सकते हैं और पापों से छुटकारा पा सकते हैं, तो सनकादिक ऋषि बताते हैं कि पापी से पापी व्यक्ति भी कथा श्रवण करने से तर सकता है। समाज में जितने भी प्रकार की दूष्प्रावृत्ति, व्यवभिचारी प्रवृति के लोग हैं जो छल-कपट तक करते हैं, अगर वो लोग भी श्रीमद् भागवत कथा या कोई अन्य कथा श्रवण कर लें तो उनके पापों का भी नाश संभव है। मन को श्रीमद् भागवत कथा पावन कर सकती है। क्योंकि मन के कारण ही व्यक्ति गलत कार्य करता है और छल-कपट पर उतारु हो जाता है। अगर मन काबू में हो तो मनुष्य इन प्रलोभनों से बचा रहे। इसलिए मन को श्रीमद् भागवत कथा में जरूर लगाएं। इस कलिकाल में यह कथा श्रवण कर मनुष्य गलत व्यसनों से बच सकता है। कथा के अंत में सभी भक्तों ने मिलकर हरिनाम संकीर्तन किया।


