भगवान के साथ खेलेंगे होली, नगाड़ों की थाप पर थिरकेगा पूरा राजिम

भास्कर न्यूज | राजिम होली के दिन राजिम में आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। श्री राजीव लोचन मंदिर का विशाल प्रांगण सतरंगी गुलाल की बौछारों से सराबोर रहेगा और आसपास के सैकड़ों गांवों से हजारों श्रद्धालु भगवान श्री राजीव लोचन के साथ होली खेलने पहुंचेंगे। दोपहर लगभग 3 बजे से रात 8 बजे तक मंदिर परिसर रंगोत्सव में डूबा रहेगा। गूंजते नगाड़ों की थाप पर होलियारे थिरकेंगे, फाग गीत गूंजेंगे और पूरा वातावरण भक्ति व उमंग से भर उठेगा। युवक-युवतियां और महिलाएं एक-दूसरे को गुलाल लगाकर सौहार्द्र और समरसता का संदेश देंगी। यहां न कोई छोटा होगा, न बड़ा हर कोई रंगों में एकाकार नजर आएगा। मंदिर प्रांगण इतना रंगों से भर जाएगा कि चेहरों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाएगा। बरसाना जैसी छटा भले न हो, लेकिन राजिम की होली अपने विशेष अंदाज में किसी से कम नहीं होगी। राजिम की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, भक्ति और समरसता का महापर्व है। हर वर्ष की तरह इस बार भी यह आयोजन अपने अनूठे रंग और भव्यता के कारण पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र रहेगा। लोग भगवान के चरणों में गुलाल लगाकर आशीर्वाद लेंगे,​ फिर मंदिर परिसर में ही रात तक भगवान के साथ होली खेलते रहेंगे। यह परंपरा सदियों से तब से चली आ रही है जब से राजिम में भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा स्थापित हुई है।
परंपरा अनुसार हुआ होलिका का दहन: राजिम में होली दहन की परंपरा विधि-विधान से निभाई गई। सबसे पहले महामाया मंदिर के पास होली जलाई गई । इसके बाद भुतेश्वर नाथ मंदिर और फिर भैरव बाबा मंदिर के समीप होलिका दहन हुआ। इसके पश्चात शहर के विभिन्न स्थानों पर होली जलाई गई। होली के दिन मंदिर के पट सुबह 4 बजे खुलेंगे। भगवान का विशेष अभिषेक, पूजा एवं श्रृंगार किया गया। श्री राजीव लोचन को कृष्ण स्वरूप में सजाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं भक्तों के साथ होली खेलने मंदिर प्रांगण में भ्रमण करते हैं। होली के दिन जैसे ही शाम होती है भगवान राजीव लोचन के छोटे विग्रह को मंदिर परिसर में निकाला जाता है। यह एक ऐसा दृश्य रहता है कि हर भक्त भगवान के साथ होली खेलने के लिए आतुर रहते हैं। भीड़ इतनी रहती है कि कई श्रद्धालु विग्रह तक पहुंच ही नहीं पाते। वे दूर से ही रंग और गुलाल को भगवान पर छिड़कते हैं। मंदिर के परिक्रमा के दौरान सतरंगी गुलालों की बौछार होने लगता है। कुछ नजर ही नहीं आता, चारों तरफ हरा नीला पीला लाल गुलाबी कलर के गुलाल उड़ाते हुए ही दिखता है। होली की सुबह से ही शहर में रंगों का दौर शुरू हो जाएगा। मोहल्लों में लोग समूहों में रंग-गुलाल खेलेंगे, महिलाएं और युवतियां टोली बनाकर उत्सव का आनंद लेंगी। दोपहर लगभग 2 बजे के आसपास शहर में कुछ समय के लिए सन्नाटा छा जाएगा। इसके बाद डेढ़ से दो घंटे के भीतर लोग एक साथ मंदिर की ओर बढ़ेंगे और देखते ही देखते प्रांगण होलियारों से खचाखच भर जाएगा। नगाड़ों की थाप, उड़ता गुलाल और झूमते भक्त यह दृश्य शाम तक निरंतर बना रहेगा। कई जनप्रतिनिधि भी रंगोत्सव में शामिल होंगे। भगवान श्री राजीव लोचन

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