चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित फतेह प्रकाश महल में आयोजित हो रहे मीरा महोत्सव का सोमवार को आखिरी दिन था। प्रोग्राम में प्लेबैक सिंगर और भजन गायक सुरेश वाडकर, छाया पुतुल कलाकार रामचंद्र पुलावर और पंडित बिरजू महाराज के बेटे जयकिशन महाराज ने अपने टीम के साथ प्रस्तुति दी। प्रोग्राम के अंत में आतिशबाजी की गई। सुरेश वाडकर द्वारा गाए गए भजनों को लोगों ने काफी एंजॉय किया। वहीं, चित्तौड़गढ़ वासियों को छाया पुतुल जैसी एक नई कला देखने को मिली। मीरा के भजनों के बाद पब्लिक डिमांड पर भी गाया गाना संत शिरोमणि मीराबाई के 525वीं में जयंती पर देश के चार स्थानों पर मीरा महोत्सव का आयोजन किया गया था। उसमें सबसे आखरी प्रोग्राम चित्तौड़गढ़ के दुर्ग स्थित फतेह प्रकाश महल में हुआ। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली, जिला प्रशासन चित्तौड़गढ़ और पर्यटन विभाग राजस्थान द्वारा यह आयोजन किया गया। तीन दिनों में कई कलाकार इस आयोजन में शामिल हुए। सोमवार को आखिरी दिन प्लेबैक सिंगर और भजन गायक सुरेश वाडकर चित्तौड़गढ़ पहुंचे और मीरा महोत्सव में अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने सबसे पहले अपने भाव व्यक्त किया और कहा कि इस पावन स्थली में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मां मीरा और महाराणा प्रताप की इस धरा पर भक्ति और सेवा करने का मौका मिला है। इसके बाद उन्होंने “पायो जी मैंने राम रतन धन पायो” भजन से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने “सांवरे के रंग रांची राणा जी”, “इतनी शक्ति हमें देना दाता”, मीराबाई के एल्बम से “मारो तो गिरधर गोपाल दूसरा ना कोई”, “अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम, रामनारायण जानकी वल्लभम”, “माई म्हारो सपना बड़ा”, “एक राधा एक मीरा दोनों ने ही श्याम को चाहा”, “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। इसके बाद उन्होंने पब्लिक डिमांड पर “ए जिंदगी गले लगा ले” और “मेघा रे मेघा” गाना गया। इस दौरान उन्होंने ऑडियंस के प्रतिक्रिया पर अपनी राय देते हुए कहा कि जब तक भजन गाए गए किसी ने भी शुरू में ताली नहीं बजाई, लेकिन फिल्मी गानों के आते ही तालियां बजने लगी। यही फर्क होता है। दीपकों की रोशनी में कठपुतलियों से दी प्रस्तुति इसके बाद संत मीराबाई के जीवनी पर छाया पुतुल की प्रस्तुति दी गई। यह प्रस्तुति केरल से आए रामचंद्र पुलावर ने अपनी पत्नी, बच्चों और साथी के साथ दी। दर्शकों के लिए एक अलग सा एक्सपीरियंस रहा है। पर्दे के पीछे दीपकों की रोशनी में कठपुतलियों से मीरा के बाल्यावस्था से प्रभु की मूर्ति में समा जाने तक की जीवनी बताई। सबसे आखिर में कथक डांसर जय किशन महाराज अपने बेटे और अन्य कलाकार साथियों के साथ श्रीकृष्णा, मीरा और राधा के जीवन पर आधारित डांस प्रस्तुत किया। सभी कलाकारों का जिला कलेक्टर आलोक रंजन, एडीएम प्रशासन प्रभा गौतम, एडीएम रावतभाटा विनोद मल्होत्रा, एसडीएम बीनू देवल ने स्वागत सत्कार किया। गायक सुरेश वाडकर की प्रस्तुति के समय निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी भी मौजूद रहे। उन्होंने सुरेश वाडकर का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें सुरेश वाडकर के सभी गाने बहुत पसंद है। सबसे आखिर में फतेह प्रकाश महल में जोरदार आतिशबाजी भी हुई। स्थानीय कलाकार ने दी शिव स्तुति की प्रस्तुति अन्य कलाकारों के साथ चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर प्रशासन के प्रोग्रामर कपिल शर्मा ने अपनी खुद की रचना “शिव स्तुति – कंकड़ कंकड़ शंकर है, रुद्र बड़े भयंकर है। शमशानी है, अविनाशी है, बसती जिसमे स्वयं काशी है, वे कैलाश निवासी है।।” की भी प्रस्तुति दी। जिसका पहले भी राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारण हो चुका है। कपिल शर्मा की शिव स्तुति पर सभी ने तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया।


