धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार शाम माहौल बदला हुआ दिखा, जब हिंदू समाज के लोगों ने मां वाग्देवी की संध्या आरती बिना किसी चित्र के की। समुदाय का आरोप है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने सुबह गर्भगृह से नया तेल चित्र जब्त कर लिया, जिसके विरोध में लोगों ने चित्र के बिना ही पूजा करने का निर्णय लिया। समाज के सदस्यों ने बताया कि कई वर्षों से उपयोग में आ रहे पुराने चित्र के स्थान पर यह नया तेल चित्र लाया गया था, जिसे सुबह ASI ने कब्जे में ले लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि समुदाय नियमित रूप से शांतिपूर्ण पूजा-अर्चना करने पहुंचता है, लेकिन इस कार्रवाई ने श्रद्धालुओं में असंतोष बढ़ा दिया है। भोज उत्सव समिति के संरक्षक हेमंत दौराया ने बताया कि “समुदाय के लोग नियमपूर्वक पूजा करने पहुंचे थे, लेकिन ASI ने चित्र जब्त कर लिया। इसी के विरोध में आज बिना चित्र के सत्याग्रह किया गया है।” उन्होंने कहा कि जब तक जब्त किया गया चित्र वापस नहीं मिलता, तब तक आरती और पूजा-अर्चना बिना चित्र के ही जारी रहेगी। भोजशाला को मुक्त करने की मांग दोहराई
दौराया ने यह भी कहा कि हिंदू समाज भोजशाला को पूर्ण रूप से मुक्त देखना चाहता है। उन्होंने उल्लेख किया कि व्यस्तताओं के कारण दैनिक सत्याग्रह में भीड़ कम हो पाती है, जिसका प्रभाव बसंत पंचमी की पूजा व्यवस्थाओं पर पड़ता है। समाज के नेताओं ने साफ कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और चित्र वापस मिलना ही उनकी प्राथमिक मांग है। देखिए तस्वीरें…


