भोपाल के राजीव गांधी भवन में शुक्रवार को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसुनवाई में आए दो गुटों में कहासुनी हो गई। इस दौरान तंवर पक्ष ने लोढ़ा (तंवर) पक्ष के एक सदस्य पर सामान्य जाति का प्रमाण पत्र लेकर सरकारी नौकरी करने का आरोप लगाया। तंवर पक्ष के लोगों ने कहा कि, दयाराम तंवर ने राजपूत प्रमाण पत्र से सरकारी सर्विस की है, लेकिन बाद में वे अपने बच्चों को एसटी प्रमाण पत्र का लाभ दिलवाने के लिए जतन करने लगे हैं। ऐसे लोगों की वजह से तंवर समाज अनुसूचित जाति से हटाया दिया गया है। ‘5 हजार लोगों ने गुमराह कर एसटी प्रमाण पत्र का लाभ उठाया’ तंवर समाज के लोगों का कहना है कि 1950 से तंवर जाति केंद्र की लिस्ट में 8वें और राज्य की लिस्ट में 20 वें स्थान पर थी, लेकिन करीब 5 हजार लोगों ने सरकारी नौकरियों में गुमराह की स्थिति कर एसटी प्रमाण पत्र का लाभ लिया। इसी के चलते 2016 में अधिकारियों ने तंवर जाति को लिस्ट से विलोपित कर दिया। विशेष पिछड़े श्रेणी का लाभ देने की मांग इस दौरान तंवर समाज कल्याण समिति जिला के सदस्य ने बताया कि, विंध्याचल और सतपुड़ा की पर्वत श्रेणियों में तंवर समाज की आबादी लगभग 12000 के आस – पास है। महाजन आयोग के 1964 में लोढ़ा और तंवर को लिस्ट में दर्शाने से अधिकारी प्रमाण पत्र बनाकर नहीं दे रहे हैं। इसी के चलते हमारी मांग है कि इन जिलों में विशेष पिछड़े श्रेणी का लाभ दिया जाए। इन जिलों में लगातार तंवर समाज के लोगों की जनसंख्या घट रही है। 10 हजार ओबीसी हो रहे प्रभावित वहीं, ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य कमलेश सिंह ने बताया कि 2019 से सभी ओबीसी परीक्षाओं पर 13 प्रतिशत का होल्ड लगा हुआ है। इनमें कॉन्स्टेबल, स्टाफ नर्स, वन्य परीक्षा, सब इंजीनियर जैसी कई परीक्षाएं शामिल है। प्रदेश में 52 प्रतिशत ओबीसी जनसंख्या पर 27 प्रतिशत रिजर्वेशन का कानून है, लेकिन कानून पारित न होने की वजह से 10 हजार लोग प्रभावित हो रहे है।


