भोपाल रेलवे स्टेशन पर “इमरजेंसी मेडिकल रूम” की शुरुआत:5 महीने से बंद पड़ी है मेडिकल डिस्पेंसरी, जनवरी से फिर खुल सकती है

भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 पर मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी द्वारा “इमरजेंसी मेडिकल रूम” का उद्घाटन किया गया। यह सुविधा भोपाल रेल मंडल और अथर्व ज्योति हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वधान से शुरू की गई है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि, इस इमरजेंसी मेडिकल रूम का उद्देश्य यात्रियों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित और प्रभावी सहायता दी जा सके। इस अवसर पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय डोगरा, मंडल इंजीनियर (मुख्यालय) श्याम नागर आदि उपस्थित रहे। दरअसल, भोपाल रेलवे स्टेशन पर करीब 5 महीने से मेडिकल डिस्पेंसरी बंद पड़ी है। रेलवे के अनुसार इसे जनवरी महीने में फिर से शुरू किया जाएगा। साल 2019 से 2024 के बीच तीसरी बार है। जब यह इमरजेंसी कक्ष बंद हो गया है। पहली बार साल 2019 में शुरू की गई थी। फिर उसके बाद बंद हो गई थी। इसके बाद 2022 में यह डिस्पेंसरी दोबारा शुरू की गई और यह पिछले 5 महीने से बंद पड़ी है। यह होगा फायदा
इस इमरजेंसी मेडिकल रूम में यात्रियों को 24×7 विभिन्न चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें प्राथमिक चिकित्सा सामग्री, ऑक्सीजन सिलेंडर, और एम्बुलेंस सेवा शामिल हैं, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान करेंगी। इसके अलावा, नेब्यूलाइजेशन, पल्स ऑक्सीमीटर, और ईसीजी मशीन जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं भी यहां उपलब्ध हैं। यात्रियों की नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए बीपी और शुगर चेकअप की सुविधा दी गई है। जरूरतमंद यात्रियों के लिए व्हीलचेयर और स्ट्रेचर का प्रबंध किया गया है। साथ ही, इस मेडिकल रूम में प्रशिक्षित डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ हमेशा सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे, जिससे रेलवे स्टेशन पर ही त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (रेलवे अस्पताल) डॉ. अजय डोगरा ने कहा कि रेल यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य रेलवे की प्राथमिकता है। इस इमरजेंसी रूम के माध्यम से यात्रीगण अब रेलवे स्टेशन पर ही त्वरित चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकेंगे। भोपाल रेलवे स्टेशन पर 5 महीने से डिस्पेंसरी बंद
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, गेलेक्सी अस्पताल टाइटल को लेकर शहर में दो अस्पतालों में लंबे समय से विवाद चल रहा था। जिसके बाद दोनों का मामला कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद रेलवे ने करार रद्द कर दिया। करीब 5 महीने से यह डिस्पेंसरी बंद हैं। पढ़ें पूरी खबर

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