‘मंगल भवन’ को नगर निगम ही चलाएगा:मेयर के बेटे बंटी पांडेय बोले- यह CSR फंड से बना; कुछ लोग कंफ्यूजन क्रिएट कर रहे थे

कानपुर में मंगल भवन के निर्माण और संचालन को लेकर चल रही चर्चाओं पर मेयर प्रमिला पांडेय के बेटे बंटी पांडेय ने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि मंगल भवन का निर्माण CSR फंड से किया गया है, लेकिन यह पूरी तरह नगर निगम का एसेट है और इसे नगर निगम ही संचालित करेगा। CSR फंड से बनने के कारण इसकी निगरानी के लिए एक कमेटी बनाई गई है, ताकि इसका इस्तेमाल जरूरतमंद और वंचित वर्ग के लिए ही हो सके। सवाल: मंगल भवन में पहला विवाह समारोह हुआ है, इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: मंगल भवन आम लोगों के लिए बनाया गया है। इसकी पहली बुकिंग पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन ने की, जो एक सामाजिक संगठन है। यहां 11 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया। यह अपने आप में अच्छी शुरुआत है और यही इस भवन का उद्देश्य भी है। सवाल: इस आयोजन और बुकिंग को लेकर काफी चर्चा रही, क्या प्रक्रिया थी?
जवाब: मंगल भवन की बुकिंग 11 हजार रुपए में की गई थी। इसके अलावा 5 हजार रुपए सिक्योरिटी मनी ली गई। कुल 16 हजार रुपए पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन के खाते से जमा किए गए। कार्यक्रम के बाद 5 हजार रुपए की सिक्योरिटी वापस कर दी जाएगी। अगर कोई टूट-फूट होती है तो उसकी भरपाई इसी सिक्योरिटी से की जाएगी। सवाल: मंगल भवन को लेकर काफी कंफ्यूजन और चर्चाएं बनी रहीं, इसकी वजह क्या रही?
जवाब: कुछ लोग जानबूझकर मंगल भवन को लेकर कंफ्यूजन क्रिएट करना चाहते थे और किया भी। लेकिन इसमें किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। मंगल भवन नगर निगम का एसेट है और नगर निगम ही इसे चलाएगा। न इसे किसी को हैंडओवर किया जाएगा और न ही निजी हाथों में दिया जाएगा। सवाल: फिर निगरानी कमेटी बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब: चूंकि मंगल भवन CSR फंड से बना है, इसलिए यह जरूरी था कि इसके इस्तेमाल पर नजर रखी जाए। ताकि नगर निगम इस भवन या इसके फंड का इस्तेमाल किसी दूसरे काम में न कर सके। जो पैसा लगा है, वह सिर्फ वंचित वर्ग के लिए ही खर्च हो। इसी उद्देश्य से निगरानी कमेटी बनाई गई है, जिसमें मैं भी सदस्य हूं। सवाल: मंगल भवन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहे हैं, आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब: आरोप-प्रत्यारोप तो हमेशा लगते रहे हैं और आगे भी लगते रहेंगे। इतिहास गवाह है कि भगवान श्रीराम को भी लोगों ने नहीं छोड़ा, तो हम तो फिर भी इंसान हैं। लेकिन एक बात साफ है, मंगल भवन का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ वंचितों के हित में ही किया जाएगा।

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