मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग में उप संचालक पद पर छत्तीसगढ़ की एक महिला अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर लाने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों को नजरअंदाज कर छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग की अधिकारी भारती सिंह राजपूत की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया है। खास बात यह है कि संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी की नोटशीट पर दर्ज आपत्ति के बावजूद यह आदेश जारी हुआ। मंत्री ने अपनी नोटशीट में स्पष्ट रूप से पूछा था- इस नियुक्ति का औचित्य क्या है? बावजूद इसके विभाग के अधिकारियों ने आदेश जारी कर दिए। कर्मचारी संगठन ने इस निर्णय को प्रदेश के अधिकारियों की योग्यता पर सवाल खड़ा करने वाला बताया है। सवाल- क्या मप्र में योग्य अधिकारी नहीं छत्तीसगढ़ से नियुक्त की गई भारती सिंह राजपूत का संस्कृति विभाग से कोई संबंध नहीं है। वे वहां के वित्त विभाग में क्षेत्रीय संपरीक्षा कार्यालय, अंबिकापुर में पदस्थ हैं। ऐसे में प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या मप्र के अधिकारी उपसंचालक पद के योग्य नहीं हैं?
प्रक्रिया ये कि पहले विज्ञापन जारी करते
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अगर प्रतिनियुक्ति करनी थी, तो इसके लिए विज्ञापन जारी किया जाना चाहिए था। मप्र के अधिकारी भी इस पद के लिए सक्षम हैं। अगर पद भरना था, तो प्रदेश के विभागों से योग्य अधिकारियों और कर्मचारियों को मौका दिया जाना चाहिए था। बिना विज्ञापन या प्रक्रिया के छत्तीसगढ़ की अधिकारी को नियुक्ति दे दी गई। ^हां, इस प्रकरण पर मैंने आपत्ति की थी। उसके बाद आदेश जारी हुआ है, तो उसका पुनः परीक्षण कर न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी। पहले प्रदेश के अधिकारी को मौका दिया जाएगा।
– धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग


