भास्कर न्यूज | लुधियाना 29 दिसंबर को पौष मास की मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। यह साल 2024 की अंतिम मासिक शिवरात्रि है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना, शिव तांडव स्तोत्र का पाठ और रुद्राभिषेक करने से सभी दोषों का नाश होता है, और महादेव की कृपा से जीवन में आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं। मंदिरों में खास पूजा, रुद्राभिषेक, पंचामृत अभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाएगा। पंडितों का कहना है कि शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने, ओम नम: शिवाय का जाप और शिव-पार्वती की आराधना करने से विवाह में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। इस पावन दिन पर भक्त देर रात तक मंदिरों में भोलेनाथ की आराधना करेंगे। साल के आखिरी शिवरात्रि के दिन लोग पंचामृत तैयार करके भोलेनाथ को अर्पित करेंगे। साथ ही 16 वस्तुएं अर्पित करके पूजा करने से ग्रह दोषों सही करेंगे। { श्री मुक्तेश्वर महादेव शिव मंदिर, मुक्ति धाम चहला में हर साल हजारों भक्त मासिक शिवरात्रि के दिन दर्शन करने आते हैं। मंदिर के पंडित सुरेश ने बताया कि इस बार भी यहां रुद्राभिषेक, नवग्रह पूजा और रात तक विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। {श्री दुर्गा शक्ति धाम, हैबोवाल के पंडित कमल शर्मा ने बताया कि मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की षोडशोपचार पूजा की जाएगी। इसमें शिवलिंग पर 16 पवित्र वस्तुएं अर्पित की जाएंगी, जिनमें बेलपत्र, अष्टगंध चंदन और पंचामृत प्रमुख हैं। षोडशोपचार पूजा से कर्क, मेष, तुला, वृश्चिक और धनु राशि वालों को लाभ होगा। उन्नति, कारोबार, पढ़ाई, विवाह, ग्रह दोष का निवारण होगा। {श्री दुर्गा माता मंदिर, जगराओं पुल के पंडित राहुल शर्मा के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दिन 108 बार ओम नम: शिवाय का जाप और शिव चालीसा का पाठ करते हैं। इसके अलावा रुद्राभिषेक भी करवाते है। इससे मन को शांति, ग्रह दोष व निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। संगला वाला शिवाला के महंत नारायण दास ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर की भक्तों में गहरी मान्यता है। मासिक शिवरात्रि के दिन विशेष पूजा और मंत्रोच्चारण से शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मासिक शिवरात्रि पर सुबह दूध से भोले बाबा का अभिषेक होगा और श्रृंगार किया जाएगा। दोपहर को फिर से दूध से अभिषेक होगा और रात का खास श्रृंगार भक्तों द्वारा किया जाएगा। मासिक शिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा और रुद्राभिषेक से न केवल आर्थिक संकट दूर होते हैं, बल्कि जीवन के अन्य कष्टों से भी छुटकारा मिलता है। इस दौरान भक्त खास तौर पर रुद्राभिषेक व पूजन के लिए आते है। मास शिवरात्रि पर भक्त खास तौर पर भोले बाबा का दूध व गंगाजल से अभिषेक करते है। ऐसा माना जाता है कि षोडशोपचार विधि से पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन से दुख, दरिद्रता, काल, कष्ट, और रोग समाप्त हो जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार, शिव पूजा के लिए आवाहन, आसन, अर्घ्य, पाद्य, पाद्यांग, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, पान, समर्पण, नीराजन, नमस्कार और विसर्जन ये 16 उपचार हैं, जिन्हें षोडशोपचार पूजा कहते हैं।


