मनुष्य के जीवन में असंतोष सबसे बड़ा दुख का कारण है

भास्कर न्यूज | लुधियाना श्री एसएस जैन सभा नूरवाला श्री संघ में विराजित महासाध्वी सुशील कुमारी महाराज ने उपस्थित लोगों को सुख-शांति से जीने के लिए अमोध सूत्र देते फरमाया कि मनुष्य के जीवन में असंतोष बहुत बड़ा दुःख का कारण है। यह तो वह आग है जो एक बार लगने के बाद बुझती नहीं। सब कुछ होते हुए भी असंतोषी व्यक्ति और हो जाए, इतना और होना ही चाहिए आदि, इसकी मन में लोभ के कारण रट लगाए रहता है। महासाध्वी जी ने कहा कि मन में लोभ के कारण बेचैनी रहती है। शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक हानि होने लगती है। नैतिकता- अनैतिकता के विचार भूल कर अधिक से अधिक संग्रह तृष्णा की लालसा के कारण जीवन से सुख शांति विदा हो जाती है और प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है। इसी कारण व्यक्ति के प्रेम-भाईचारा सहिष्णुता के गुण लुप्त हो रहे है और समाज में परस्पर संघर्ष अशांति युद्ध-हिंसा की घटना घटित हो रही है। साध्वी रत्न शुभिता ने सभी श्रद्धालुओं के लिए आने वाले नववर्ष के लिए मंगल सुख शांति की कामना हेतु प्राचीन स्तोत्र उवसग्गहरं का पाठ कराया। उन्होंने बताया कि सभी लोगों को लौकैषणा तथा वित्तैषणा के कुचक्र से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि तुम्हारा किया गया शुभ कर्म ही तुम्हारी पहचान है। अपनी वाहवाही, झूठी प्रशंसा, प्रतिष्ठण प्रसिद्धि के लिए प्रपंच रचना ही लोकेषणा है। लोकैषणा की चाह में व्यक्ति धन का अपव्यय भी करता है। साध्वी जी ने कहा कि जीवन में कभी कष्टों का झंझट आ जाए तो धर्म की छतरी लगाकर प्रार्थना का सुरक्षा कवच धारण कर लेना चाहिए। इस अवसर पर अभिनंदन जैन परिवार द्वारा धर्म प्रभावना की गई और कथा में उपस्थित बच्चों को रेणु जैन परिवार द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए।

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