मकर संक्रांति पर तिल, गुड़ व अन्नदान का विशेष महत्व: उपाध्याय

अंबिकापुर | मकर संक्रांति पर्व को लेकर आम लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए परशुराम मंदिर के पंडित महेंद्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि पंचांग के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 39 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ सूर्य उत्तरायण होंगे और खरमास समाप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार यदि संक्रांति प्रदोषकाल के बाद रात में आती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है। इसी आधार पर इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को धार्मिक रूप से मान्य होगी। पंडित उपाध्याय ने बताया कि आम धारणा है कि मकर संक्रांति हमेशा 14 जनवरी को होती है, जबकि सूर्य और चंद्रमा की गति के कारण इसकी तिथि में परिवर्तन होता रहता है। लगभग 70-72 वर्ष पूर्व यह पर्व 13 जनवरी को मनाया जाता था। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति केवल खान-पान का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्नान, दान और पुण्य अर्जन का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन पवित्र स्नान, तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न दान का विशेष महत्व है। पंडित महेंद्र उपाध्याय ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे 15 जनवरी को शास्त्र सम्मत तिथि के अनुसार विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मकर संक्रांति पर्व मनाएं। इस अवसर पर परशुराम स्थल केनाबांध में भी धूमधाम से पर्व मनाया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहने की संभावना है।

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