मछली पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदल रही, किसानों को हो रहा लाभ

भास्कर न्यूज | मनेंद्रगढ़ जिले में मछली पालन ग्रामीण आजीविका के एक सशक्त और टिकाऊ विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित डबरियों, अमृत सरोवरों तथा सिंचाई जलाशयों का उपयोग कर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि महिलाओं और किसानों को आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में नई मजबूती मिल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मनेंद्रगढ़ जिले के तीनों जनपद पंचायत क्षेत्रों में विगत वर्षों में 780 से अधिक डबरियों का निर्माण किया है। इसके अतिरिक्त मिशन अमृत सरोवर अंतर्गत निर्मित 87 अमृत सरोवरों में से चयनित 15 अमृत सरोवरों में इस वर्ष मछली पालन प्रारंभ किया है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इस गतिविधि से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही हैं। मछली पालन से ग्रामीणों को दोहरा लाभ मिल रहा है। एक ओर यह आय का स्थायी स्रोत बन रहा है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों के पोषण स्तर में भी सुधार हो रहा है। गांवों में आजीविका डबरी निर्माण की मांग निरंतर बढ़ रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान मनरेगा योजना अंतर्गत निर्मित 500 डबरियों में मत्स्य विभाग द्वारा किसानों को अनुदान पर मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार वर्ष 2025-26 में 300 डबरियों तथा 15 अमृत सरोवरों में मत्स्य बीज (फिंगरलिंग) वितरण कर मत्स्य पालन को प्रोत्साहित किया गया। इस पहल से ग्रामीणों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। मछली के परिवहन व विपणन को सुदृढ़ बनाने 20 किसानों को आइस बॉक्स भी बांटे, जिससे उपभोक्ताओं को ताजी मछली उपलब्ध कराई जा रही है। जिले में वर्तमान में 15 मछुआ सहकारी समितियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

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