शाजापुर में सोयाबीन कटाई के लिए उमरिया जिले से आए मजदूरों ने मजदूरी न मिलने पर शनिवार को कलेक्टर निवास पर धरना दिया। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कई दिनों तक काम करने के बाद भी पूरी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। मजदूरों ने इससे पहले भी कलेक्टर से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शनिवार को कलेक्टर निवास पर पहुंचने पर कलेक्टर ने उनसे मुलाकात नहीं की। कोतवाली थाने से पहुंचे पुलिस बल ने मजदूरों को थाने ले जाकर उनकी बात सुनी। कोतवाली थाना प्रभारी संतोष सिंह वाघेला ने मजदूरों की शिकायत दर्ज की। इसके बाद मजदूर एसडीएम से मिलने के लिए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
दो मजदूर समूहों के साथ बेइमानी उमरिया जिले से मजदूरों के दो समूह सोयाबीन कटाई के लिए बेरछा रेलवे स्टेशन पर उतरे थे। इनमें से एक समूह में गंगाराम चौहान के साथ 14 मजदूर थे, जिन्हें खेरखेड़ी निवासी अर्जुन के खेत पर काम के लिए ले जाया गया। इन मजदूरों ने 9 दिनों तक काम किया, जिसकी कुल मजदूरी 63 हजार बनती है। उन्हें केवल 6 हजार रुपए दिए गए, जबकि 57 हजार रुपए बकाया हैं। मजदूरों का आरोप है कि खेत मालिक ने शेष राशि देने से इनकार कर दिया और उनके साथ गाली-गलौज भी की। दूसरे समूह में केदार ओमकार के साथ उनके 11 रिश्तेदार शामिल थे। इन्हें बिरगोद निवासी किसान देवेंद्र के खेत पर सोयाबीन काटने के लिए ले जाया गया। इन मजदूरों ने 10 दिनों तक काम किया, जिसकी कुल मजदूरी 57,850 रुपए बनी। इसमें से उन्हें 10 हजार रुपए का भुगतान किया गया, जबकि शेष राशि देने से किसान ने मना कर दिया। मजदूरों का कहना है कि पैसे मांगने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और गाली-गलौज की गई। दोनों ही समूहों के मजदूरों ने अपनी मजदूरी के लिए प्रशासन और पुलिस से गुहार लगाई है। मजदूरों का कहना है कि वे हर साल यहां सोयाबीन काटने आते हैं, लेकिन इस बार उन्हें अपनी मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिल रहा है। इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। दोनों पक्षों को बुलाया है शाजापुर एसडीएम मनीषा वास्कले का कहना है कि मजदूरों और दोनों खेत मालिकों को भी बुलाया गया है। मामला समझने के बाद जो भी कार्रवाई होगी वह आगे की।


