भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम कमिश्नर ने अवैध खोखों-बिल्डिंगों और अतिक्रमण पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं मगर एस्टेट विभाग के टारगेट पर रेहड़ियां ही नजर आ रही हैं। कमिश्नर ने निर्देश पर मजीठा रोड में 11 अवैध खोखों को सील किया गया था मगर 72 घंटों में ही सील तोड़कर दुकानें सजा ली गई। ढाई माह बाद भी अवैध खोखे धड़ल्ले से उसी जगह चल रहे हैं। निगम अफसरों की कार्यशैली से सवाल उठ रहे हैं कि रेहड़ी वालों को हटाने के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही मगर अवैध खोखों-बिल्डिंगों के मामलों में ढील बरती जा रही हैं। हैरान करने वाली बात तो यह है कि 1 माह बाद ही कमिश्नर को मामले की शिकायत भेजी गई थी मगर इसके बाद भी अवैध खोखों को हटवाना जरूरी नहीं समझा गया। जिन खोखों को सील किया गया था उनमें सुभाष जूस बार के 5 तो यम्मी के 3 और सुभाष फूड नाम के 3 खोखे शामिल थे। निगम अफसर खोखे लगाने वाले दुकान मालिकों पर मेहरबान रहने की बजाए ईमानदारी से चेकिंग करें तो अधिकतर के पास अलॉटमेंट लैटर नहीं मिलेगा। अवैध खोखों को सील कराने की बजाए हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए। जिस तरह की खानापूर्ति वाली कार्रवाई निगम के अफसर कर रहे उससे अतिक्रमण व जाम जैसी समस्या से निजात पाने के दावे हवाहवाई हो चुके हैं। मजीठा रोड में लगे अवैध खोखों के सील तोड़कर दोबारा से दुकान चलाने पर कोई कार्रवाई ढाई माह बाद भी नहीं कर पाने की वजह कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल व ज्वाइंट कमिश्नर जय इंद्र से पूछी गई तो चुप रहना जरूरी समझा। यह तीनों ही खोखे सड़क किनारे लगे हुए हैं। इनमें यम्मी नाम के 3 खोखे पहले भी सील किए गए थे लेकिन दिवाली-गुरुपर्व पर सरकारी छुट्टी का फायदा उठा सील तोड़ते हुए दोबारा से दुकानदारी शुरू कर दी गई थी। इसलिए सीपी को कार्रवाई के लिए भी लिखा गया था। बाद में 10 नवंबर को फिर से सील किया गया था लेकिन दूसरी बार सील करने की कार्रवाई बेअसर साबित हुई।


