भास्कर न्यूज | बाड़मेर बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रानीगांव में गुरुवार को मनरेगा बचाओ जन-आंदोलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने उपस्थित होकर ग्रामीणजनों से संवाद किया। पूर्व विधायक जैन ने नरेगा का नाम बदलने तथा गारंटी कानून को कमजोर करने के प्रयासों पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीब, मजदूर और किसानों के लिए रोजगार की गारंटी है। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में इसे कमजोर करना आमजन के अधिकारों का हनन है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस अवसर पर पूर्व प्रधान मूलाराम मेघवाल, पूर्व सरपंच आत्माराम, गुलाबाराम मेघवाल, नरसिंगाराम, गजेसिंह, सालूराम, खरथाराम चौधरी, लूणाराम वादी, हरजीराम आदि उपस्थित रहे। नरेगा को बदला नहीं बल्कि खत्म ही कर दिया गया: चौधरी चौहटन विधानसभा क्षेत्र के लीलसर में गुरुवार को मनरेगा बचाओ, संग्राम जन आंदोलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश प्रभारी एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि मनरेगा योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, पेयजल के समाधान का कार्य किया जा रहा था, जिसको खत्म करने का निर्णय सरकार का तानाशाही रवैया है। इन्होंने सिर्फ मनरेगा का नाम ही नहीं बदला बल्कि इसको खत्म ही कर दिया गया। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने कहा कि मनरेगा का अधिकार पंचायतों के पास था, लेकिन अब यह अधिकार उनसे छीन लिया गया है जिसके कारण अब पंचायतों के पास कोई अधिकार नहीं बचा है। पूर्व मंत्री हेमा राम चौधरी ने कहा कि मनरेगा ही एक ऐसी योजना है जिससे गांव में बैठा हर व्यक्ति इससे लाभान्वित था, लेकिन इसको खत्म करना आम आदमी की जरूरत के साथ धोखा करना है। जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा ने कहा कि भाजपा सरकार की ओर से मनरेगा को कमजोर ही नहीं बल्कि खत्म ही कर दिया गया है। यह निर्णय किसान मजदूर विरोधी है।


