हर मनुष्य अपने पुण्य और पाप के अनुसार अपने कर्मों का फल पाता है। संसार में ऐसा कोई नियम नहीं बना कि कर्म कोई करे और फल कोई और पाए। यह संभव ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है। मनुष्य को चाहिए कि वह समझे कि वह खुद ही अपना भाग्य विधाता है। आपका भाग्य कोई देवता या परमात्मा नहीं बनाता, आपके द्वारा ही किए गए शुभ-अशुभ कर्मों से ही अपने भाग्य का निर्माण करते हैं। इसलिए हमेशा प्रेम-करुणा और वात्सल्य के माध्यम से अपने सौभाग्य का निर्माण कर सकते हैं। ये बातें अपने रांची प्रवास के चौथे दिन जैनमुनि सुयश सागर महाराज ने रातू रोड स्थित श्री वासुपूज्य जिनालय में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। मुनिश्री ने कहा कि दुनिया में आदमी सोचता है कि सामने वाला हमारा भला-बुरा करने वाला है। उस विचार को त्यागते हुए यह चिंतन करना है कि पुण्य-पाप हर समय हमारे साथ चलता है। रातू रोड स्थित श्री वासुपूज्य जिनालय में प्रवचन


