बीकानेर| उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि कमल कुमार स्वामी ने शुक्रवार को तेरापंथ सभा गंगाशहर के सहमंत्री शांतिलाल पुगलिया के निवास स्थान पर प्रवचन के दौरान कहा कि मनुष्य आठ कर्म अपने जन्म से साथ लेकर आता है। जैन दर्शन का मूल सिद्धांत है कि आत्मा से परमात्मा बनना। आत्मा तभी परमात्मा बन सकती है जब यह आठ कर्म आत्मा से अलग हो जाते हैं। आत्मा से इन कर्मों को दूर करने के लिए भगवान् महावीर ने ज्ञान दर्शन चारित्र और तप का मार्ग बताया है। आठ कर्म है। ज्ञानावरणीय कर्म, दर्शनावरणीय कर्म, मोहनीय कर्म, कर्म वेदनीयकर्म, आयुष्य कर्म नामकर्म, गौत्रकर्म, अंतराय कर्म त्याग का बड़ा महत्व है। जिसके पास सब वस्तुएं हो, साधन हो ओर फिर उनका त्याग करे वो असली त्याग है। जितना त्याग उतना उतना धर्म। मुनि ने कहा कि सादा जीवन ओर उच्च विचार रखने चाहिए।


