मनुष्य को आवश्यकता से अधिक चिंता में नहीं पड़ना चाहिए : भारद्वाज

भास्कर न्यूज |जालंधर मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी में भक्तों की ओर से शनिवार को हवन किया गया। ब्राह्मणों ने विधिवत वैदिक रीति के अनुसार पूजन के बाद आहुतियां डलवाईं। धाम के संस्थापक नवजीत भारद्वाज ने कहा संत मूलक दास जी एक दिन उनके गांव में एक साधु कुछ दिनों के लिए आए। वे गांव वालों को सुबह-शाम रामायण का पाठ सुनाते थे। एक दिन मलूक दास जी भी पहुंच गए। उस समय साधु गांव वालों को रामजी की महिमा के बारे में बता रहे थे। इस बात को जांचने के लिए दास मलूका घने जंगल में जाकर एक पेड़ के ऊपर बैठ गए, शाम को कुछ सिपाही भोजन करने के लिए पेड़ के नीचे आकर बैठे, तभी उन्हें शेर की दहाड़ सुनाई पड़ी और वह डर के मारे भोजन-पानी वहीं छोड़कर भाग गए। पेड़ के नीचे भोजन पड़ा होने के बाद भी दास मलूका भोजन करने पेड़ से नहीं उतरे, उनके मन की हठ थी, अगर राम जी ध्यान रखते हैं, तो वे स्वयं खिलाएंगे। कुछ देर बाद कुछ डाकू उधर से गुजरे और भोजन देखकर बड़े खुश हुए। वह भोजन ग्रहण करने वाले थे, तभी उनके मन में विचार आया कि कहीं भोजन में जहर तो नहीं है। इसलिए उन्होंने आसपास खोजना प्रारम्भ किया और पेड़ पर छुपे हुए दास मलूका को देख लिया। बस फिर क्या था, डाकुओं ने दास मलूका को पकड़कर सबसे पहले उसे जबरदस्ती भोजन कराया और उसके बाद स्वयं भोजन किया। इस घटना के बाद दास मलूक को ईश्वर के प्रति गहरी श्रद्धा हो गई और गांव पहुंचकर उन्होंने सबको यह घटना बताई। तभी से संत मलूक दास जी कहते हैं, ‘अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूक कह गए, सबके दाता राम।’

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