ग्वालियर में एक विवाहित महिला को ‘लापता’ बताकर उसकी तलाश की मांग करने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका को हाईकोर्ट की युगल पीठ ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने इसे महिला की निजता और गरिमा का उल्लंघन मानते हुए याचिकाकर्ता दिग्विजय सिंह कौरव पर 10 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया है। बता दें कि याचिकाकर्ता कौरव ने दावा किया था कि 30 अक्टूबर 2023 को गोल का मंदिर थाना पुलिस मुरावली गांव से एक महिला को जबरन ले गई थी। तब से वह लापता है। उसने यह भी कहा कि महिला उसके साथ रहती थी। न्यायालय ने याचिकाकर्ता से गंभीर सवाल किया कि यदि पुलिस 2023 में महिला को ले गई थी, तो उसने दो साल तक याचिका क्यों नहीं दायर की। इस विलंब ने उसके दावे को संदिग्ध बना दिया। पड़ोसी के फोन से कराई महिला से बात सुनवाई के दौरान मुरार सीएसपी, थाना प्रभारी और महिला उपनिरीक्षक कोर्ट में उपस्थित हुए। पुलिस ने बताया कि महिला अपने पति और बच्चों के साथ सुरक्षित है। महिला उपनिरीक्षक ने पड़ोसी के फोन पर महिला से बात कराई, जिसमें उसने स्पष्ट किया कि वह अपने परिवार के साथ खुश है और याचिकाकर्ता से उसका कोई संबंध नहीं है। महिला ने उससे मिलने या जानने से भी इनकार किया।


