मां के दर्शन के लिए झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत कई सीमावर्ती राज्यों से आते हैं श्रद्धालु

2026 नव वर्ष आगमन से पूर्व 31 दिसंबर 2025 को मां भद्रकाली मंदिर समेत पुरे परिसर को बेहतरीन तरीके से साफ-सफाई कार्य की गई। स्वच्छता अभियान के बाद पूरा मंदिर परिसर चकाचक हो गया। परिसर के साथ-साथ साल के अंतिम शाम मंदिर एवं मां की प्रतिमा को मंदिर के पुजारियों ने विशेष रूप से गंगाजल से वैदिक मंत्रोच्चार करते हुए स्नान कराया। फिर ज्वेलरी, वस्त्र एवं सुगंधित फूलों की माला से साज-सज्जा की गई। साज-सज्जा के बाद माता रानी की प्रतिमा भव्य हो गई है। 1 जनवरी 2026 कि अहले सुबह विशेष रूप से मां की श्रृंगार पूजन एवं आरती की हुई। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की जनसैलाब उमड़ी। इसके बाद दिन भर यहां झारखंड, बिहार, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ समेत कई सीमावर्ती राज्यों के कोने-कोने से आए श्रद्धालु, पर्यटक और सैलानियों की भीड़ मां की दर्शन पूजन के लिए जुटेगी। इन राज्यों के श्रद्धालु साल को यादगार बनाने के लिए माता रानी के मंदिर में मां की पूजा अर्चना के लिए प्रत्येक नव वर्ष पर पहुंचते हैं। यहां वे मां की आराधना कर नए साल के आगमन पर पूजा अर्चना कर नव वर्ष मंगलमय की कामना करते हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सदस्य और स्थानीय पुलिस प्रशासन पुख्ता इंतजाम कर ली है। अत्यधिक भीड़ के मद्देनजर आवश्यकता अनुसार इटखोरी थाना के अधिकारी और पुलिस सशस्त्र बल के जवान अपने-अपने ड्यूटी पर मुस्तैद रहेंगे। मां की पूजा अर्चना के बाद यहां आए श्रद्धालु मंदिर के पीछे से गुजरी यू आकार की उत्तरवाहिनी नदी एवं मंदिर परिसर के इर्द-गिर्द बैठकर शाकाहारी लजीज भोजन का लुत्फ उठाते हैं। भद्रकाली मंदिर प्रांगण में सुंदर, मनमोहक और आकर्षक बगीचा पिकनिक मनाने वाले पर्यटकों, सैलानियों और श्रद्धालुओं के लिए सज धज कर तैयार है। मंदिर प्रांगण की इतिहास काफी पौराणिक है। यह पौराणिक पावन धार्मिक स्थल भगवान बुद्ध से लेकर मेधा मुनि एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम से भी जुड़ा हुआ है। यह जैन धर्म के लिए भी बड़ा स्थल माना जाता है। यह स्थल जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतल नाथ की जन्म कल्याणक भूमि भी है। यहां जैन धर्मावलंबियों द्वारा एक विशाल जैन मंदिर का निर्माण कार्य किया जा रहा है। मंदिर का निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है।

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