भास्कर न्यूज | जालंधर हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बहुत महत्व है। पूर्णिमा तिथि पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। माघ माह की पूर्णिमा व्रत 12 फरवरी दिन बुधवार को है। माघ मास में नदियों में स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस मास में किए गए तीर्थ दर्शन और नदी स्नान से अक्षय पुण्य मिलता है, जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों का असर खत्म होता है। भक्ति में मन लगा रहता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि धार्मिक मान्यता की वजह से ज्यादातर श्रद्धालु रोज नदी में स्नान करते हैं, माघ पूर्णिमा पर माघ स्नान खत्म हो जाएंगे। इस महीने में पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पाए हैं तो पूर्णिमा पर अपने क्षेत्र की नदी में स्नान जरूर करना चाहिए। स्नान के बाद नदी के किनारे पर ही जरूरतमंद लोगों को अनाज और धन का दान करें। ऐसा करने से धर्म लाभ के साथ ही कुंडली के ग्रह दोषों का असर कम हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस महीने सूर्य देव की आराधना से मोक्ष मिलता है। पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। सुबह सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना गया है। जबकि शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा कर के व्रत खोलना चाहिए। मान्यता है कि विष्णु पूजा में तिल से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। जरूरतमंदों को तिल दान करने चाहिए। इस दिन हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। पूर्णिमा पर शिव का जलाभिषेक करें। तांबे के लोटे में जल भरें और ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करते हुए पतली धार से शिवलिंग पर अर्पित करें। स्नान का महत्व… ग्रंथों में कहा गया है कि पूर्णिमा के मौके पर पवित्र नदियों में नहाने से मोक्ष तो मिलता ही है साथ ही कई तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन तीर्थ में लोग इकट्ठा होते हैं। जो लोग तीर्थ क्षेत्र नहीं जा पा रहे हैं, किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल, काले तिल, चंदन मिलाकर स्नान करना चाहिए। ध्यान करते समय सभी तीर्थों का और पवित्र नदियों का ध्यान करना चाहिए।


