भास्कर न्यूज | जालंधर मानसून की एंट्री नए हफ्ते में हो रही है। धरती की सूखी कोख को बारिश का अमृत मिलेगा। लेकिन माहिरों की चिंता ही है कि शहरों में सड़कों से लेकर तमाम इमारतों के परिसरों में कंक्रीट की फ्लोरिंग धरती तक पानी को पहुंचने से रोक रही है। लाखों लीटर पानी सीवरेज में बह रहा है। जालंधर में 2011 से लेकर अब तक की बारिशों का ट्रैक देखें तो बरसातें कम हो रही हैं। बारिशों से धरती में रीचार्ज होने वाला पानी कम हो रहा है। जबकि धरती की कोख से खींचे जाने वाले पानी के कारण के कारण जालंधर में आदमपुर को छोड़ सभी ब्लॉक डार्क जोन में शामिल हो गए हैं। धरती के नीचे केवल 5355 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ही बचा है। ये जानकारी जालंधर की हाइड्रोलॉजी रिपोर्ट-2000 से मिलती है। इसे बचाने के लिए मानसून में पानी को सहेजना होगा। जैसे पौधारोपण किया जाता है, इसी प्रकार अपने प्लाटों-घरों के आंगन में एक हिस्सा कच्चा रखना होगा ताकि वाटर री-चार्जिंग हो सके। पार्कों, खुले सार्वजनिक स्थानों में बरसाती पानी का संरक्षण हर हाल में करना होगा।


