कामकाज में साबित नहीं हो सके स्मार्ट स्मार्ट सिटी; 5 साल पहले जो काम हो जाना थे, वे अब तक अधूरे, ऐसे 13 प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी के कामों को पूरा करने की डेडलाइन मार्च 2025 है। अब तक 13 प्रोजेक्ट अधूरे हैं। इनमें एबीडी एरिया की पांच सड़कें भी शामिल हैं। इनमें कुछ काम ऐसे भी हैं, जिन्हें वर्ष 2019 में ही पूरा हो जाना चाहिए था। अब सभी 13 प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी को 170 करोड़ रुपए की जरूरत है। अब तक स्मार्ट सिटी कंपनी करीब एक हजार करोड़ रुपए के काम कर चुकी है। गुरुवार को स्मार्ट सिटी कार्यालय पर एडवायजरी बोर्ड की बैठक में फंड सहित अनेक मुद्दों पर बात हुई। मराठी संकुल, गांधी हॉल के मेंटेनेंस, एबीडी एरिया में ड्रेनेज के काम, गोपाल मंदिर सहित अन्य ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव का मुद्दा उठा। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि मार्च 2025 तक काम पूरे करने हैं, इसलिए एक फोरम बनाया जाना चाहिए। इसमें सभी जनप्रतिनिधियों को लिया जाए। उनसे मशविरा लेने के बाद कोई निर्णय लें।
गांधी हॉल को पर्यटन विभाग को सौंपा जाए
एमओजी लाइन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भवन में गार्डन की जमीन का मुद्दा भी उठा। उसकी 60 फीसदी जमीन प्रशासन के रिकॉर्ड में दर्ज है। उनसे जमीन लेने का मुद्दा भी उठा। साथ ही यह सुझाव भी आया कि गांधी हॉल को मप्र पर्यटन विभाग को सौंप दिया जाए। इसकी वजह यह है कि स्मार्ट सिटी कंपनी के पास मेंटेनेंस का कोई बजट नहीं है। इसलिए इसे पीपीपी मॉडल पर देने की बात भी कही गई। एबीडी एरिया की पांचों सड़कें अधूरी देरी से बैठक पर जनप्रतिनिधि नाराज
महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर आशीष सिंह की मौजूदगी में हुई बैठक में सबसे पहले इसी बात पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज करवाई कि हर चार माह में होने वाली बैठक बीते डेढ़ साल से नहीं हुई। महापौर बोले कि आगामी समय में शहर के विकास संबंधित, स्मार्ट सिटी से संबंधित कोई भी विकास कार्य हो, इसका निर्णय एडवाइजरी समिति के सुझाव के आधार पर बोर्ड तय करे। अहिल्या पथ को लेकर भी जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेकर निर्णय लेने पर बात हुई। यह भी तय हुआ कि डेवलपमेंट को लेकर स्मार्ट सिटी कंसल्टेंट नियुक्त करें, जो शहर के पूर्ण विकास को लेकर अपनी राय दे। प्लॉट बेचने के बाद हुई आय के कुछ हिस्से से शहर में अच्छी लाइब्रेरी का प्रस्ताव भी रखा गया। मालूम हो, स्मार्ट सिटी कंपनी के सबसे बड़े रीडेंसीफिकेशन के प्रोजेक्ट के प्लॉट बेचने पर करीब 400 करोड़ की आय प्रस्तावित है।


