मावा 380 रुपए, दिवाली से पहले 20 रुपए और महंगा:उज्जैन से 100, रतलाम से 60 रुपए अधिक दाम; त्योहारों में 200 क्विंटल हर दिन होती है खपत

इंदौर में मावे के भाव 380 रुपए किलो हो गए हैं। गुरुवार तक भाव 360 रुपए था। शुक्रवार को 20 रुपए का और इजाफा हो गया। उधर, रतलाम में सफेद मावा 340 और पीला 320 रुपए किलो है। उज्जैन में भाव 280 रुपए किलो हैं। यानी उज्जैन की तुलना में 100 रुपए और रतलाम की तुलना में मावा 60 रुपए महंगा हो गया है। दिवाली से पहले भाव बढ़ने से मिठाइयों के भावों पर असर पड़ेगा। शुद्ध मावा ऐसे पहचानें : हल्का पीला रंग, दूध-घी जैसी हल्की खुशबू। स्वाद मलाईदार। स्वाद में हलका कड़वापन हो तो समझिए केमिकल का इस्तेमाल हुआ है। हलका गर्म करने पर असली मावा नरम होगा और ज्यादा तेल नहीं छोड़ेगा। असली मावा पानी में घुलेगा नहीं, पानी पर तैरता रहेगा। पैक्ड मावा पर निर्माण और उपयोग की अंतिम तारीख और FSSAI नंबर देखें। उज्जैन में मावा उन्हेल व आसपास के गांवों से बड़ी मात्रा में पहुंचता है
उज्जैन के पास उन्हेल और आसपास के गांवों में दूध का उत्पादन अधिक है। इसलिए मावा भी बड़ी मात्रा में बनता है। यही मावा उज्जैन तक पहुंचता है। इंदौर में भिंड, मुरैना और ग्वालियर से भी बड़ी मात्रा में मावा पहुंचता है, लेकिन वहां के मावे की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं।
त्योहारों में बढ़ जाती है खपत
वैसे तो इंदौर में सालभर मावे की खपत होती है, लेकिन त्योहार में खपत तीन गुना तक बढ़ जाती है। इंदौर में जिस निर्माण लागत में मावा तैयार होता है, उससे कम दाम पर मावा दूसरे जिलों से इंदौर पहुंच जाता है। इंदौर में रोजाना 80 से 100 क्विंटल मावे की खपत होती है, जो त्योहारों में बढ़कर 200 क्विंटल तक पहुंच जाती है। मावे की हर खेप की हो रही जांच
खाद्य औषधि प्रशासन ने इस बार त्योहार से पहले ही जांच अभियान तेज कर दिया है। मुख्य खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि बाहर से आने वाले मावे की हर खेप की जांच हो रही है। पिछली बार की तरह इस बार भी मोबाइल लैब से मौके पर ही टेस्ट किए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं से अपील है कि मावा खरीदते समय रंग, खुशबू और स्वाद पर ध्यान दें। कोई संदेह हो तो विभाग को तत्काल शिकायत करें। इंदौर में मावे पर अब तक हुई बड़ी कार्रवाई 25 से 30 रुपए प्रति किलो खर्च बढ़ रहा
रतलाम से माल लाने में ही हमारा खर्च 25 से 30 रुपए बढ़ जाता है। ऊपर से रोजाना भाव में उतार-चढ़ाव रहता है। ऐसे में इंदौर में मावा महंगा होना स्वाभाविक है।
– स्वदेश सिंघल, व्यापारी, छावनी त्योहार पर मांग ज्यादा है और सप्लाय सीमित। उपभोक्ता को शुद्ध मावा मिले, इसके लिए व्यापारी भी अतिरिक्त ध्यान दे रहे हैं।
– बालमुकुंद अग्रवाल, व्यापारी, सीतलामाता बाजार

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