माह-ए-रमजान के आखिरी अशरे की शुरुआत आज, तीसरे जुमे के दिन मस्जिदों में उमड़े नमाजी

भास्कर न्यूज | जालंधर शनिवार को 21वें रोजे के साथ ही रमजान महीने के आखिरी तीसरे अशरे की शुरुआत होगी। शुक्रवार को रमजान के तीसरे जुमे पर शहर की सभी मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी उमड़े, जिनकी नमाज को लेकर अस्थाई रूप से मस्जिद कमेटियों की तरफ से प्रबंध भी किए गए थे। मौलाना वली शिमाली ने बताया कि रमजान चांद के महीनों में नौवां महीना होने के साथ एक पवित्र व मुकद्दस महीना भी है, जिसके रोजे मुसलमानों पर फर्ज (जरूरी) हैं। इसके तीन अशरों (दस दिन) में से पहला अशरा रहमत का है जिसमें अल्लाह की रहमत (दया) लोगों पर इस प्रकार बरसती है कि जिसका कोई हिसाब नहीं। रमजान महीने का दूसरा अशरा मगफिरत (क्षमा) का और आखिरी अशरा जहन्नुम से निजात दिलाने वाला होता है, जो बेहद अहम माना जाता है। आखिरी अशरे तक रोजा व इबादत का सिलसिला कायम रखना बड़ी बात होती है। यही वजह है कि आखिरी अशरे में इबादत करने वालों को अल्लाह ताला इनाम के तौर जहन्नुम से निजात यानी मुक्ति देने का वादा किया है। शुक्रवार को रमजान के तीसरे जुमे को लेकर मस्जिद-ए-एमएफ खांबड़ा में भी कार्यक्रम करवाया गया। इसमें मुख्यातिथि के रूप में एडीजीपी पंजाब एमएफ फारुकी पहुंचे। उन्हो‌ंने नमाज से पहले मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि रमजान का पवित्र महीना मानव प्रेम की राह दिखाता है। यह हमारे भीतर ईश्वर के प्रति समर्पण, लोगों के बीच आपसी सद्भाव एवं सौहार्द का भाव उत्पन्न करता है। यह पावन माह एक दूसरे के काम आने की भावना जागृत करता है। रमजान की एक खासियत यह भी है कि इससे रोजा रखने वालों में सहनशीलता व धैर्य का प्रसार होता है। रमजान में ईश्वर की आज्ञा का पालन करने के लिए स्वेच्छा से रोजेदार परहेज की आदत अपनाने भी लगते हैं। कई चीजों को कुछ समय के लिए अपने ऊपर हावी होने से रोककर संयम दर्शाते हैं। इस तरह के भाव हर वर्ग के बीच एकता का उदाहरण देकर समाज को शक्तिशाली बनाने के लिए अति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि रमजान का मतलब व्यक्ति के लिए खुद को अनुशासन में ढालना है ताकि पूरा साल इसी तरह से वह जमीन से जुड़कर दूसरों के साथ हमदर्दी वाला व्यवहार करे। इस मौके पर लकी दादरा, प्रधान मजहर आलम मजाहरी, मुस्लिम संगठन पंजाब के प्रधान एडवोकेट नईम खान, तेजा सिंह जौहल, अली हुसैन, नवी गीतक, नदीम सलमानी, मोहम्मद निजाम, सिकंदर शेख, शमशाद ठेकेदार, कयूम खान व अन्य मौजूद रहे। एडीजीपी फारुकी। जालंधर| मुस्लिम समुदाय में धार्मिक यात्रा उमराह का अहम महत्व है। इन दिनों रमजान का पाक महीना जारी है और शनिवार से तीसरे और आखिरी अशरे की शुरूआत होगी जो महत्वपूर्ण है। जालंधर शहर से उमराह की धार्मिक यात्रा पर भी लोग रवाना हो रहे हैं, जिन्हें मुस्लिम समुदाय की तरफ से फूल-मालाएं पहनाकर रवाना किया जा रहा है क्योंकि उमराह की यात्रा भी अहम होती है। इसलिए मुस्लिम समुदाय के सभी लोगों का सपना होता है कि वह हज और उमराह जैसी धार्मिक और पवित्र यात्रा पर रवाना हों। शुक्रवार को उमराह के लिए ऑल इंडिया जमात-ए-सलमानी ट्रस्ट के चेयरमैन आबिद हसन सलमानी, उनकी पत्नी मेहरुनिसा सहित अशोक नगर के सलीम सलमानी और उनकी पत्नी वरीसा इस यात्रा पर रवाना हुए। इस मौके पर दुआ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता पहुंचे। आबिद सलमानी ने बताया कि वह चौथी बार साउदी अरब जा रहे हैं और ईद का पवित्र के त्योहार की खुशियां भी वहीं पर मनाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी को उमराह और हज पर जाना चाहिए। इस मौके पर मौलाना अबू बकर की तरफ से दुआ करवाई गई। अपने दीन के कामों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। इस मौके पर अल्पसंख्यक कमिशन के पूर्व सदस्य नासिर सलमानी, एडवोकेट नईम खान, सिकंदर शेख, मैक्स सलमानी, वसीम सलमानी, शहजाद सलमानी, सलीम सलमानी, नसीम सलमानी, मुस्तकीम सलमानी, सरफराज खान व अन्य मौजूद रहे। मस्जिद-ए-कुबा में जुमे की नमाज अदा करते मुस्लिम समुदाय के लोग।

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