राजस्थान हाईकोर्ट ने शैक्षणिक सत्र के बीच में बड़े पैमाने पर अध्यापकों के ट्रांसफर करने पर हैरानी जताई हैं। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने इसे लेकर सरकार से पूछा है कि वह किस पॉलिसी के तहत मिड-सैशन में इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफर कर रही हैं। अदालत ने इसका स्पष्टीकरण देने के लिए मुख्य सचिव और प्रमुख शिक्षा सचिव को 23 जनवरी को हाईकोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। बैंच ने यह आदेश मैना गढ़वाल और महेश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। इनके अधिवक्ता संदीप कलवानियां ने बताया कि सरकारी स्कूलों में 1 जुलाई से ट्रांसफर शुरू होते हैं। सरकार ने 3 अगस्त से लेकर अब तक करीब 12 हजार से ज्यादा वरिष्ठ अध्यापक, स्कूल व्याख्याता और प्रिंसिपल के ट्रांसफर कर दिए। हमने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में ट्रांसफर बैन है, लेकिन सरकार बिना पॉलिसी के सरकार से विशेष परमिशन लेकर बड़े पैमाने पर ट्रांसफर कर रही हैं। वहीं 12 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसे में इतने बड़े पैमाने में ट्रांसफर होने से टीचर्स के साथ स्कूलों के विद्यार्थियों पर भी विपरीत असर पड़ रहा हैं। उनकी पढ़ाई भी बाधित हो रही हैं।


