भास्कर एक्सक्लूिसव बीएसएल से मिली जानकारी के मुताबिक मिथिला एकेडमी स्कूल, सेक्टर-4 के लीज का नवीनीकरण नहीं किया गया है। जबकि इसकी लीज की अवधि 20 फरवरी 2019 को ही समाप्त हो गई है। बीएसएल ने स्कूल प्रबंधन को लीज के नवीकरण के लिए नोटिस भी कर चुका है, लेकिन अब तक स्कूल प्रबंधन ने लीज नवीकरण नहीं कराया है। हालांकि बीएसएल को बिजली, पानी के बिल का भुगतान किया जा रहा है। बीएसएल प्रबंधन ने वर्ष 1985 में िमथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल को सेक्टर-4 में 50 डिसमिल जमीन आवंटित किया गया है। बीएसएल की ओर से आवंटित इसी भूमि के आधार पर स्कूलों ने सीबीएसई से मान्यता ली है और स्कूल का संचालन किया जा रहा है। यहां 10वीं तक की पढ़ाई के लिए 50 डिसमिल जमीन चाहिए, जबकि 12वीं तक की पढ़ाई के लिए 75 डिसमिल जमीन चाहिए। जबकि यहां 12वीं तक की पढ़ाई हो रही है। हर पांच वर्ष में स्कूलों के संबद्धता के िलए एनओसी लेने का नियम है। इसके तहत स्कूल संचालक को या प्रबंधन कमेटी को फायर, बिल्डिंग, आरटीई समेत सात बिंदुओं पर जानकारी देकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) से एनओसी लिया जाता है। इसके लिए डीईओ सभी रिपोर्ट की जांच करते हैं और निरीक्षण कर एनओसी देते हैं। लेकिन नियमानुसार कम जमीन वाले स्कूल को एनओसी मिल जाना, शिक्षा विभाग की ओर से दिए जा रहे एनओसी पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है। बिना किसी जांच के ही एनओसी दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार मिथिला एकेडमी का संबद्धता 2029 तक है। सीबीएसई मान्यता के लिए कितनी चाहिए जमीन {मेट्रो शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई में न्यूनतम 1600 वर्ग मीटर {अन्य शहरों में 2000 वर्ग मीटर कक्षा 10 तक के लिए और 3000 वर्ग मीटर कक्षा 12 तक के लिए {ग्रामीण क्षेत्र में कम से कम 2 एकड़ लगभग 8000 वर्ग मीटर {विशेष क्षेत्रों में पहाड़ी इलाके, पूर्वोत्तर राज्य और द्वीपों में छूट दी जा सकती है। {भूमि का स्वामित्व स्कूल के नाम पर होना चाहिए व 15 साल की लीज पर ली गई हो। हाल ही में अध्यक्ष बना, इस संबंध में जानकारी नहीं है पांच वर्ष में एक्सटेंशन के लिए एनओसी – जगरनाथ लोहरा, डीईओ, बोकारो। बच्चों को झूठ नहीं बोलने और गलत रास्तों पर चलने से बचने की सीख देने में स्कूल ही गलती कर रहे हैं। ऐसा ही मामला राज्य के शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले बोकारो स्टील सिटी में हो रही है। बोकारो के कई स्कूलों ने गलत तरीके से सीबीएसई से मान्यता ली है। स्कूल के पास नियमानुसार जितनी जमीन होनी चाहिए, उससे कम भूमि पर ही सीबीएसई से मान्यता ले लिया गया है। इसका खुलासा बोकारो डीसी की ओर से बनाई गई कमेटी की जांच में हुआ है। सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि संबद्धता के रिन्युअल के दौरान भी इस प्रकार की कमी पकड़ी नहीं जा सकी। नियमानुसार जिला के शिक्षा विभाग से इसकी संबद्धता के लिए एनओसी मिलता है और उस एनओसी को सीबीएसई को ड्रोन फोटो समेत भेजा जाता है। यह प्रक्रिया हर पांच वर्ष में होती है। डीसी की जांच कमेटी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा


