हाई कोर्ट कॉलोनी स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में मंगलवार को झारखंड मिथिला मंच के जानकी प्रकोष्ठ के तत्वावधान में जानकी नवमी पर माता सीता के प्राकट्य दिवस को भव्य व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सर्वप्रथम मां भगवती को प्रसाद का भोग पातैर के रूप में महासचिव निशा झा के द्वारा लगाया गया। उसके बाद कन्या का श्रृंगार पूजन किया गया। प्राकट्योत्सव कार्यक्रम में 51 कुमारी कन्याओं का पूजन किया गया। उसके बाद कन्याओं को भोजन कराया गया, जो कि मिथिला की पारंपरिक धार्मिक संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रसाद के रूप मे शुद्ध मिठाइयां व केला परोसा गया और उनके सम्मान में दक्षिणा व मिथिला परंपरा अनुसार खोंइछा देकर विदा किया गया। मंच के वरिष्ठ सदस्य सियाराम झा सरस ने बच्चों को मां जानकी के प्राकट्य के विषय में विस्तार से बताया। मंच की अध्यक्ष ममता झा ने कुमारी कन्याओं व बच्चों को बताया कैसे राजा जनक अकाल के समय हल जोतने गये और पुनौराधाम में माता सीता धरती से प्रकट हुई। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जानकी प्रकोष्ठ की अध्यक्ष ममता झा, महासचिव निशा झा, कोषाध्यक्ष उषा पाठक के संग संग बबिता झा, रंजना झा, रानी झा, कविता चौधरी, प्रियंका प्रियदर्शी, शिल्पा झा, सरिता पाठक, मीना सिंह, नम्रता सोनी, सुप्रिता झा, पूजा झा, सुनीता मिश्रा, सरोज देवी, विनिशा व अन्य ने योगदान दिया। जय जय भैरवि असुर भयाऊनि… गीत से हुई कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड मैथिली मंच के बहिना प्रकोष्ठ के तत्वावधान में जानकी प्राकट्य दिवस मनाया गया। प्रथम चरण में विद्यापति दलान हरमू के परिसर में माता जानकी की विधिवत पूजा-अर्चना की गयी। इसके साथ विद्यापति व माता जानकी को सामूहिक रूप से पुष्पांजलि अर्पित की गई। विद्यापति रचित भगवती बंदना ‘जय जय भैरवि असुर भयाऊनि’ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। साथ ही सोहर आदि अनेक विधा में गीतों की प्रस्तुति बबिता झा, बिट्टू झा, सुनीता झा, अनिता झा, नमीता मिश्र, किरण झा के समूह गान के रूप में हुई। दूसरे चरण में डीएवी स्वर्ण रेखा विद्यानगर में 51 कुंवारी कन्या का पूजन कर बच्चियों को उपहार दिया गया। बदरी नाथ झा ने बच्चियों को प्रश्न-उत्तर के माध्यम से माता जानकी के बारे में पूरी जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद ने माता सीता की मूर्ति स्थापित की अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद ने कोकर के वार्ड-6 के पार्षद कार्यालय में मां जानकी पूजनोत्सव का आयोजन किया। मां जानकी पूजनोत्सव मे मिथिला समाज के मैथिल व कोकर के स्थानीय लोगों के सहयोग से संपन्न हुआ। यह पहला अवसर रहा जब किसी मिथिला-मैथिली संस्था के द्वारा मूर्ति पूजन का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा व पूजन का आयोजन आचार्य पंडित उमा शंकर झा और यजमान किरण पाठक के द्वारा वैदिक विधि से संपन्न हुआ। रांची के स्थानीय कलाकार रूपा चौधरी व निभा झा ने मैथिली सोहर गीत और अन्य पारंपरिक गीतों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। ‘मिथिला में सिया धिया आई जन्मली धन्य जनकपुर धाम हे’ और ‘जगदम्ब अहि अबलंब हमर’ पर लोग खुब झूमे।


