गुना के एक किसान पारंपरिक खेती छोड़ चाइनीज खीरे की खेती कर रहे हैं। नेट हाउस में खीरे की खेती की जा रही है। एक साल में वह तीन बार फसल ले रहे हैं। एक एकड़ में 5 लाख तक का मुनाफा हो रहा है। इस बार की स्मार्ट किसान सीरीज में पढ़िए कंप्यूटर इंजीनियर ने रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड की नौकरी छोड़ कैसे शुरू की खीरे की खेती… गुना जिले के आरोन में रहने वाले सचिन श्रीवास्तव ने पारंपरिक खेती छोड़ चाइनीज खीरे की खेती शुरू की है। उनकी शुरुआती पढ़ाई आरोन से ही हुई है। उन्होंने आरोन डिग्री कॉलेज से बीएससी किया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2006 में भोपाल से एमसीए (मास्टर्स इन कंप्यूटर एप्लीकेशन) किया। पढ़ाई पूरी होते ही मुंबई के एक निजी बैंक में नौकरी लग गई। उन्हें सालाना 8 लाख का पैकेज मिला। सचिन नौकरी तो कर रहे थे, लेकिन उनका मन ज्यादा उसमें नहीं लग रहा था। वह अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते थे। इसीलिए 2019 में नौकरी छोड़ वापस आरोन आ गए। शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक खेती की, लेकिन वह कुछ अलग करना चाहते थे। इसीलिए तीन साल पहले चाइनीज खीरे की खेती करना शुरू किया। इसके लिए हॉर्टिकल्चर विभाग से मंजूरी कराकर सबसे पहले नेट हाउस बनाया। यह पॉली हाउस जैसा ही होता है। अंतर बस यह है कि पॉली हाउस में ऊपर पॉलीथिन की छत होती है, जबकि नेट हाउस में जालीदार छत होती है। वह एक एकड़ में खीरे की खेती कर रहे हैं। सचिन ने बताया- ऐसे करते हैं खेत तैयार तापमान मेंटेन रखना जरूरी
चाइनीज खीरे की खेती के लिए तापमान भी काफी महत्वपूर्ण है। इसके लिए 30 से 35 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। इसलिए नेट के जरिए इसे सीधी धूप से बचाया जाता है। इसके अलावा तापमान मेंटेन करने के लिए इसमें ऊपर भी एक ड्रिप इरीगेशन का सेटअप लगाया जाता है। अमूमन फसलों में केवल पानी देने के लिए ड्रिप इरीगेशन का उपयोग होता है, लेकिन चाइनीज खीरे के लिए ऊपर भी ड्रिप इरीगेशन लगाकर स्प्रिंकलर लगाए जाते हैं। अगर कभी तापमान ज्यादा हो, तो इन स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव कर तापमान को मेंटेन किया जाता है। एक हैक्टेयर में लगते हैं 72 हजार के बीज
सचिन श्रीवास्तव बताते हैं कि एक हेक्टेयर में करीब 7 हजार बीज की बुवाई होती है। एक बीज की कीमत 9-10 रुपए है। बीज के दाम कंपनियों के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। इस हिसाब से एक हैक्टेयर में बीज की लागत लगभग 72 हजार रुपए आती है। बुवाई के एक महीने पहले गोबर की करीब 20 ट्रॉली या इससे ज्यादा ही खाद डाली जाती है। एक ट्रॉली का खर्च 1500 से 2000 रुपए होता है। अगर खाद खेत पर ही तैयार किया है, तो ये लागत कम हो जाती है। इसके अलावा सिंचाई, दवाइयां, मजदूरी, तुड़ाई की लागत जोड़ दी जाए, तो डेढ़ से दो लाख के लगभग लागत आती है। 35 दिन में तैयार हो जाती है फसल
सचिन श्रीवास्तव ने बताया कि ये ऐसी फसल है, जिसे साल में तीन बार लिया जा सकता है। अगर नवंबर महीने में बुवाई हुई है, तो जनवरी से फल आना शुरू हो जाते हैं। 35 दिन बाद आप खीरे की तुड़ाई कर उसे बाजार में भेज सकते हैं। पूरी फसल चक्र (क्रॉप साइकिल) लगभग तीन महीने की होती है। खीरे बड़े होने के बाद इनकी तुड़ाई की जाती है। रोजाना शाम को तुड़ाई होती है। फिर इन्हें 15-15 किलो की थैलियों में पैक कर बाजार में भेज दिया जाता है। अभी वह गुना की मंडी में चाइनीज खीरा भेज रहे हैं। एक एकड़ में पांच लाख तक मुनाफा
सचिन ने बताया कि अगर दाम सही मिलें, तो एक एकड़ में पांच लाख तक का शुद्ध मुनाफा होता है। जनवरी में उन्हें 35 रुपए प्रति किलो तक के दाम मिले। अब चूंकि देसी खीरा भी बाजार में आ गया है, तो दाम कुछ कम हो गए हैं। अब 20 रुपए किलो का भाव मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अगर फसल सही रहे, देखरेख ठीक रहे, तो एक एकड़ में एक क्रॉप साइकिल में लगभग 20 टन उत्पादन होता है। इस हिसाब से देखा जाए तो लगभग 7 लाख रुपए की उपज हो जाती है। बीमारियां और रोग
सचिन ने बताया कि मौसम खराब होने पर यानी मौसम अगर ठंडा है और अचानक से गर्मी बहुत बढ़ जाए तो विल्ट रोग की संभावना बढ़ जाती है। इसकी वजह से पौधे पीले पड़ने लग जाते हैं और धीरे-धीरे मर जाते हैं। इसलिए पौधों की जांच करते रहना चाहिए कि कोई रोग या कीट का असर तो नहीं है। व्हाइट फ्लाई, माइट, थ्रिप्स कीट भी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। थ्रिप्स रस चूसक होती है जो पत्ते का रस चूस लेती है, जिससे आगे का पत्ता सिकुड़ जाता है। इसकी वजह से पीछे के फूल भी खराब होने लगते हैं। माइट्स कीट पत्ते को नीचे से पूरा जला देती है। इन सभी से बचने के लिए इन्सेक्टिसाइड का इस्तेमाल करना चाहिए। ये भी पढ़ें… अश्वगंधा की खेती- दो हजार रुपए खर्च, एक लाख प्रॉफिट परंपरागत फसलों से इतर किसान मेडिसिनल प्लांट्स की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं। कारण, ये फसलें नकदी होती हैं, जो कम समय में मोटा मुनाफा दिलाती हैं। अश्वगंधा ऐसी ही औषधीय खेती है। एमपी के स्मार्ट किसान सीरीज में गंजबासौदा के ग्राम सुनारी के रहने वाले किसान राजेंद्र सिंह रघुवंशी से मिलवाते हैं। उन्होंने परंपरागत खेती के साथ अश्वगंधा लगाई है। पढ़ें पूरी खबर… स्ट्रॉबेरी पर 5 लाख खर्च, आमदनी 11 लाख महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाली स्ट्रॉबेरी की खेती अब मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में भी की जा रही है। छिंदवाड़ा के युवा किसान ने यूट्यूब देखकर स्ट्रॉबेरी की खेती करते हुए हर साल 36 लाख का मुनाफा कमाया है। स्ट्रॉबेरी की खेती में जितनी लागत आती है उसका दोगुना लाभ मिलता है। इसीलिए यह फायदे की खेती साबित हो रही है। पढ़ें पूरी खबर…


