ब्यावर |शिक्षा विभाग द्वारा असुरक्षित भवनों के नाम पर मूल गांवों से दूर शिफ्ट किए गए स्कूलों को लेकर ग्रामीणों का विरोध आखिरकार रंग लाया है। ग्रामीणों के कड़े रुख और बच्चों को स्कूल न भेजने के फैसले के बाद प्रशासन ने स्कूलों को पुनः मूल स्थान पर संचालित करने का निर्णय लिया है। सोमवार को अधिकारियों की ओर से किए गए मौका मुआयना की रिपोर्ट विभाग को सौंपी गई। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सालाकोट को विभाग ने पूर्व में राजकीय प्राथमिक विद्यालय लगता का बाडिया में शिफ्ट कर दिया था। दोनों स्कूलों के बीच दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने एक भी बच्चे को स्कूल नहीं भेजा। दो दिनों तक स्कूल में बच्चों की उपस्थिति शून्य रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए कनिष्ठ अभियंता और पीईईओ ने स्कूल का निरीक्षण किया। जांच में पाया कि विद्यालय के केवल दो कमरे मरम्मत योग्य हैं, जबकि शेष कमरे सुरक्षित हैं। अब स्कूल को पुनः सालाकोट में ही संचालित किया जा रहा है। इसी प्रकार का मामला राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ी पोल में देखने को मिला। विभाग ने इसे 8 किलोमीटर दूर राजकीय प्राथमिक स्कूल देवनगर में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। ग्रामीणों ने इस पर कड़ा एतराज जताया और बच्चों को इतनी दूर भेजने से साफ मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि दूरी अधिक होने तथा जंगल होने के कारण बच्चों को नहीं भेज सकते, ऐसे में स्कूल को गांव में ही शुरू करने की मांग की जा रही थी। तकनीकी जांच के बाद पाया गया कि स्कूल का कोई भी कमरा जर्जर श्रेणी में नहीं है, केवल कुछ हिस्सों में मरम्मत की आवश्यकता है। प्रशासन ने स्कूल को पुनः मूल भवन में ही संचालित करने की अनुमति दे दी है। दैनिक भास्कर ने शीतकालीन अवकाश के बाद शुरू हुए स्कूलों को शिफ्ट करने के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने रायपुर ब्लॉक के सीबीईओ को स्कूल भवनों की जांच कर मौका रिपोर्ट बनाने के आदेश जारी किए थे।


