इंदौर और भोपाल मेट्रो के लिए बना गए डिपो के शेड में बड़ा फर्क सामने आया है। दोनों के टेंडर में एक जैसी शर्त रखी गई थी, 1300 रुपए वर्ग मीटर का रेट भी समान ही था। भोपाल में 30 साल उम्र वाली स्टैंडिंग सीम शीट लग रही है, जबकि इंदौर में नॉर्मल रूफ शीट जो बाजार में 600 रु. वर्गमीटर में उपलब्ध है। इसमें करीब पांच करोड़ के घोटाले की आशंका है, जिसके प्रमाण भास्कर ने मेट्रो के एमडी को भेजे हैं। भोपाल में कम्प्यूटराइज्ड मशीन से स्टैंडिंग सीम शीट्स ही लगाई गई हैं, जबकि इंदौर में नॉर्मल रूफ शीट्स के टुकड़े स्क्रू से कस दिए गए हैं। अभी से क्रेक दिखाई देने लगे हैं। नार्मल शीट मुड नहीं पाती, इसलिए 4-4 मीटर के टुकड़े लगाए जाते हैं। स्टैंडिंग सीम एक साथ 16-17-18 मीटर की लंबाई में जरूरत के हिसाब से आती है, जिसे कंप्यूराइज्ड मशीन से कर्व दिया जाता है। सीधी बात – हरीश गुप्ता, मेट्रो डिपो प्रोजेक्ट मैनेजर, केएसएम बशीर कंपनी रेट तो सेम ही है, पर मुझे भोपाल की जानकारी नहीं है मेट्रो के शेड में स्टैंडिंग सीम शीट के बजाय साधारण शीट क्यों लगा रहे हैं? – कान्ट्रैक्ट के हिसाब से ही वहां पर प्रोफाइल शीट लगाई जा रही है। रेट 1300 स्के. मीटर का था, इसमें भोपाल में स्टैंडिंग सीम शीट लग रही है? – रेट तो यही है इसी के आधार पर हम प्रोफाइल शीट लगा रहे हैं, मुझे भोपाल की जानकारी नहीं है। आप आधे रेट की शीट लगा रहे हैं? – इस बारे में एमएआरसीएल से बात करें। मेट्रो के जीएम ने सवाल सुनते ही कॉल काटा, मैसेज का भी जवाब नहीं दिया इंदौर मेट्रो के डिपो का काम जीएम अजय कुमार के अंडर में है। भास्कर ने जब उन्हें पूरी बात बताई तो उन्होंने सवाल सुनते ही कॉल काट दिया। उन्हें वाट्सएप पर पूरी जानकारी फोटो और टेंडर की कॉपी के साथ भेजी गई, लेकिन वे जवाब देने से बचते रहे। एमडी मेट्रो एस कृष्ण चैतन्य को जब भास्कर ने फोटो और टेंडर की कॉपी भेजी तो उन्होंने पूरी जांच कराने की बात कही।


