नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) की प्रधान पीठ नई दिल्ली ने भोपाल के कोलार रोड क्षेत्र में खेतों में सीवेज जल छोड़े जाने से संबंधित मामले को स्वत: संज्ञान में लिया है। सुनवाई के लिए भोपाल बैंच में प्रकरण प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए हैं। ट्रूब्नल ने यह मामला रामलाल मीणा द्वारा भेजी गई पत्र याचिका के आधार पर दर्ज किया। जिसमें आरोप लगाया गया कि मानसरोवर डेंटल एवं आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज कोलार रोड से प्रतिदिन भारी मात्रा में बिना उपचारित सीवेज जल खुले खेतों में छोड़ा जा रहा है। याचिका के अनुसार, लगभग 130 एकड़ भूमि इस जल से सिंचित हो रही है। इस भूमि पर उत्पन्न खाद्यान्न व सब्जियां कोलार क्षेत्र की लगभग 20 प्रतिशत आबादी द्वारा उपभोग की जा रही हैं। जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो रहा है। शिकायत में बीमारियों के बारे में बताया शिकायत में भूजल स्रोतों के प्रदूषण, दुर्गंध फैलने और कैंसर, पेट संबंधी रोग, हेपेटाइटिस समेत अन्य संक्रामक बीमारियों के मामलों में वृद्धि का भी उल्लेख किया गया। ट्रूब्नल ने मामले को संज्ञान में लिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान आवेदक उपस्थित नहीं हुआ। फिर भी न्यायहित में आवेदन को खारिज न करते हुए उसे स्थगन प्रदान किया गया। चूंकि कारण कार्य मध्य प्रदेश में हुआ। इसलिए ट्रूब्नल ने यह मामला एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ भोपाल के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 12 मार्च को मामले में सुनवाई होगी।


