मेड ली.पीआर सॉफ्टवेयर का नया अपडेट, सभी सिविल सर्जनों को निर्देश, एक अक्टूबर से लागू होगा सिस्टम

पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को ‘मेड.ली.पीआर’ सॉफ्टवेयर के नए अपडेटेड वर्जन-2025 को लागू करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था 12 सितंबर से शुरू होकर 15 सितंबर से पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से लागू होनी थी, लेकिन किसी कारणवश इसे अब 1 अक्तूबर तक लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। नए आदेशों के तहत अब से सभी एमएलआर और पीएमआर (पोस्टमार्टम रिपोर्ट) को सीधे सॉफ्टवेयर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जांच अधिकारी को ऑनलाइन पोर्टल पर ई-साइन करना अनिवार्य होगा। इसके बाद रिपोर्ट फ्रीज कर दी जाएगी, ताकि उनमें किसी प्रकार का फेरबदल न हो सके। सिविल अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य मेडिकल-लीगल रिकॉर्ड को डिजिटल और सुरक्षित बनाना है। अब मरीजों और मृतकों से संबंधित महत्वपूर्ण रिपोर्टें सीधे पोर्टल पर उपलब्ध रहेंगी, जिससे जांच एजेंसियों को समय पर डेटा मिल सकेगा और न्यायिक प्रक्रियाएं तेज होंगी। इसके अलावा सेहत विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी सिविल सर्जन और स्वास्थ्य संस्थान सुनिश्चित करें कि उनके स्तर पर नए वर्जन का उपयोग बिना किसी देरी के शुरू कर दिया जाए। इस दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या के समाधान हेतु विभाग ने हेल्पलाइन नंबर और तकनीकी सपोर्ट टीम की सुविधा भी उपलब्ध करवाई है। गौरतलब है कि इससे पहले विभाग ने एमएलआर और पीएमआर एंट्री के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटरों को मानदेय देने संबंधी आदेश भी जारी किए थे। लेकिन अभी तक डाटा आप्रेटरों की नियुक्ति करने के बजाए विभाग के अधिकारी टेली मेडिसिन विभाग और माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के पहले से ही नियुक्त कर्मियों से यह काम करा रहे हैंं। लेकिन नए आदेश से अब हर स्तर पर मेडिकल लीगल रिपोर्टिंग को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस कदम से जहां सरकारी अस्पतालों में रिकॉर्ड प्रबंधन आसान होगा, वहीं जांच एजेंसियों और अदालतों को भी लाभ मिलेगा।

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