मेयर-MLA ने बंद कमरे में की हाउस की प्रोसिडिंग फिक्स:विरोध हुआ तो MLA का इशारा मिलते ही मेयर बोली, एजेंडा पास, मीटिंग खत्म,

लुधियाना मेयर इंद्रजीत कौर के नगर निगम हाउस चलाने के तरीके से विपक्षी पार्षद खुश नहीं हैं। पार्षदों का आरोप है कि मेयर हाउस की जनरल मीटिंग चलाने के लिए MLA पर डिपेंड रहती हैं। सोमवार को हुई निगम हाउस की बैठक में विपक्षी दलों ने जैसे ही मेयर को घेरना शुरू किया वैसे ही विधायकों ने इशारा किया और मेयर ने एजेंडा के पक्ष में हाथ खड़े करने की कॉल दी। विधायकों व आप पार्षदों ने हाथ खड़े किए। मेयर ने एजेंडा बहुतम के आधार पर पास होने की घोषणा की और मीटिंग खत्म होने की घोषणा कर दी। जब मेयर ने एजेंडे पर वोटिंग करवाई तब विपक्षी पार्षद खड़े होकर कुछ प्रस्तावों पर विरोध जता रहे थे। निगम जनरल हाउस की मीटिंग से पहले मेयर, कमिश्नर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और MLA ने बंद कमरे में बैठक की। बैठक में हाउस की प्रोसिडिंग फिक्स की गई।सूत्रों के अनुसार MLA ने मेयर को साफ कह दिया था कि पहले एजेंडा पढ़वाएं और उसके बाद जैसे ही विपक्ष हल्ला करेगा वैेस ही मीटिंग खत्म करके उठ जाएंगे। 20 मिनट में हाउस की मीटिंग खत्म नगर निगम की मीटिंग 3:43 बजे शुरू हुई। पहले राष्ट्रगान हुआ और उसके बाद दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन हुआ। फिर सेक्रेटरी ने एजेंडा पढ़ने की अनुमति मांगी। 3:50 बजे एजेंडा पढ़ना शुरू किया।
बीच में विरोध हुआ। इसी दौरान विधायक मंच पर मीडिया से बात करने लगे। विपक्षी पार्षदों ने नारेबाजी की और 4:03 बजे मीटिंग खत्म हो गई। इस तरह मीटिंग सिर्फ 20 मिनट तक चली। मेयर को डिफेंड करते हैं MLA पार्षद रोहित सिक्का का कहना है कि मेयर इंद्रजीत कौर पहली बार पार्षद बनी और साथ ही मेयर भी बन गई। नगर निगम हाउस की प्रोसिडिंग का उनके पास ज्यादा अनुभव नहीं है। ऐसे में वो विपक्ष के सवालों का सही से जवाब नहीं दे पाती। जहां मेयर फंसती दिखती हैं MLA उनको डिफेंड करने के लिए सामने आ जाते हैं। 7 मेयरों के साथ काम किया, ऐसा हाउस नहीं देखा नगर निगम हाउस में नेता प्रतिपक्ष शाम सुंदर सिंह मल्होत्रा का कहना है कि वो नगर निगम में सात मेयरों के साथ काम कर चुके हैं। कभी सत्ता पक्ष में रहे तो कभी विपक्ष में। लेकिन कभी इस तरह विपक्ष की बातों को इग्नोर नहीं किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसा हाउस कभी नहीं देखा। पूर्व में प्रस्ताव कमेटी के पास जाते रहे शाम सुंदर मल्होत्रा का कहना है कि विपक्ष जिस प्रस्ताव पर प्रमुखता से विरोध करता था उसके लिए मेयर पार्षदों की एक कमेटी बनाते थे और प्रस्ताव कमेटी के पास भेजा जाता था। कमेटी प्रस्ताव पर चर्चा करती थी और उसमें जो खामियां होती थी उन्हें दूर करके दोबारा हाउस में पेश किया जाता था। बड़े-बड़े प्रस्ताव बिना चर्चा के पास भाजपा पार्षद दल की नेता पूनम रतड़ा का कहना है कि मेयर ने बड़े-बड़े प्रस्ताव बिना चर्चा के पास करवा दिए। नगर निगम लिमिट में 110 गांवों को जोड़ने के प्रस्ताव का सभी विरोध करते रहे लेकिन मेयर ने वो भी पास करवा दिया। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट वाला प्रस्ताव भी 1200 करोड़ का है। इतने बड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा नहीं की और इसे पास कर दिया।
विपक्ष का आरोप, चेहतों को देना है ठेका विपक्ष के नेता शाम सुंदर मल्होत्रा, पूनम रतड़ा, रोहित सिक्का व अन्य ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का ठेका आप सरकार अपने चेहतों को देना चाहती है। यह ठेका 1200 करोड़ रुपए में दिया जा रहा है। उनका कहना है कि ठेके को लेकर क्या शर्तें होंगी किस तरह से कंपनी काम करेगी कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। कूड़ा प्रोसेसिंग की लागत में 4 गुणा बढ़ोत्तरी विपक्षी पार्षदों का कहना है कि अभी तक कूड़े की प्रोसेसिंग पर नगर निगम 935 रुपए प्रति टन खर्च करता है जबकि नए प्रस्ताव के हिसाब से निगम कंपनी को 3300 रुपए प्रति टन देने जा रही है। विपक्ष का सवाल है कि आखिर प्रोसेसिंग में इतनी बढ़ोत्तरी क्यों की गई? इससे किसको फायदा पहुंचाया जाएगा? मेयर ने एडिशनल कमिश्नर को जवाब देने को कहा: विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए मेयर ने एडिशनल कमिश्नर को आगे किया। कमिश्नर जब विपक्ष के सवालों पर घिरे तो विधायकों ने उन्हें वापस बुलाया और मेयर को इशारा करके मीटिंग खत्म करवा दी। मेयर बोली, चर्चा के बाद प्रस्ताव बहुमत के आधार पर पास मेयर इंद्रजीत कौर का कहना है कि एजेंडे में कुल 8 प्रस्ताव थे। जिसमें से दो प्रस्ताव एफएंडसीसी व पिछली हाउस की बैठक से संबंधित थे। बाकी छह प्रस्तावों पर चर्चा हुई और उसके बाद बहुमत के आधार पर एजेंडा पास किया गया।

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