भास्कर न्यूज | अमृतसर रीगो ब्रिज के पास रेलवे की करोड़ों की कीमती जमीन को कथित तौर पर कौड़ियों के भाव निजी कंपनी को लीज पर देने का मामला सामने आया है। इस जमीन पर एक प्राइवेट कंपनी द्वारा बड़ी इमारत का निर्माण किया जा रहा है, जिसे लेकर भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले को उठाते हुए डॉ. राम चावला ने कहा कि यह जमीन सरकारी संपत्ति है और भारतीय रेलवे के अधीन आती है, इसके बावजूद इसे निजी निर्माण के लिए देना गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे के उच्च अधिकारियों की अंदरूनी मिलीभगत के चलते यह जमीन सस्ते दामों पर आवंटित की गई है। डॉ. राम चावला ने दावा किया कि आम जनता को भ्रमित करने के लिए निर्माण स्थल पर ‘रेलवे के निर्माणाधीन’ का बोर्ड लगाया गया है, ताकि लोग यह समझें कि यह काम रेलवे द्वारा किया जा रहा है, जबकि असल में निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा हो रहा है। इस निजी निर्माण कार्य के कारण रीगो ब्रिज का निर्माण कार्य भी धीमी गति से चल रहा है, जिससे अमृतसर के लोगों को भारी ट्रैफिक जाम और रोज़ाना की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिज प्रोजेक्ट पहले ही देरी का शिकार है और अब यह विवाद हालात को और बिगाड़ रहा है। डॉ. राम चावला ने सवाल उठाया कि जब भारतीय रेलवे खुद यात्रियों के लिए यात्री निवास और अन्य सुविधाएं विकसित करने में सक्षम है, तो फिर कीमती जमीन एक निजी कंपनी को सौंपने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि यह एक बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का संकेत हो सकता है, जिसकी निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है। मामले को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला और पूर्व सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता श्वेत मलिक को लिखित शिकायत देंगे। डॉ. राम चावला ने मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच करवाए, और यदि किसी भी अधिकारी या विभाग की संलिप्तता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


