युवा अवस्था में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं खेल पाए, अब युवाओं को तराश रहे, वेटरन स्पर्धाओं में भी प्रतिनिधित्व

भास्कर न्यूज | अलवर बचपन में अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनने का सपना लिए युवा अवस्था तक खेल मैदान में खूब मेहनत की। प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक की कई प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाए। इतना होने पर भी निराश नहीं हुए और खेल मैदान पर सक्रिय रहे। युवा अवस्था में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी नहीं बने सिर्फ जुनून की बदौलत अंतरराष्ट्रीय स्तर के वेटरन खिलाड़ी बन गए। कहानी है एथलेटिक्स से जुड़े विशन कालरा व जीत कौर व बैडमिंटन से जुड़े राजकुमार जैन की। अब ये आम खिलाड़ी के प्रेरणा स्रोत बनकर उन्हें खेल का प्रशिक्षण भी निशुल्क दे रहे हैं। विशन कालरा ने राजस्थान विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खेला। राजस्थान के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया। 1980 से 1983 तक की इनका नाम एथलेटिक्स में प्रदेशभर में रहा। हरियाणा में जन्म लेने वाली जीत कौर सांगवान ने 8वीं तक खेलों भाग लिया। शादी के बाद ससुराल पक्ष में कठिन परिस्थितियों के बीच इन्हें आर्थिक तंगियों व विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। बाद में हरियाणा से वे अलवर आई और उन्होंने गोला फेंक जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय वेटरन खिलाड़ी के रूप में वर्ष 2000 में थाईलैंड में भाग लिया। 2009 तक वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेटरन खिलाड़ी के रूप में विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने गई। 65 साल से अधिक उम्र की होने के बाद भी खेल मैदान पर नजर आती हैं। बैडमिंटन के क्षेत्र में जिला व राज्य में राजकुमार जैन का नाम रहा। पारिवारिक व व्यावसायिक मजबूरियों के बीच इस प्रतिभावान खिलाड़ी को खेलों में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिला। फिर 2015 का अपने खेल के हुनर के बूते पर जिला स्तरीय, राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उन्होंने नामी खिलाड़ियों का हराया। इसके बाद स्वीडन में अंतरराष्ट्रीय स्तर की वेटरन प्रतियोगिता के 55 वर्ग में भाग लेने के लिए गए। जैन 60 साल से अधिक की आयु के हैं और अब जयकृष्ण क्लब में खेलने के साथ युवा खिलाड़ियों को खेलों के गुर भी सिखाते हैं। वे मैदान में अब भी सक्रिय हैं। विशन कालरा

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