यूनिवर्सिटी में वित्तीय संकट सरकार की सोची-समझी चाल: रेसटा

कोटा| राजस्थान की 16 सरकारी यूनिवर्सिटीज की आर्थिक बदहाली को लेकर शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेश उपाध्यक्ष गजराज सिंह मोठपुर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन 6-6 माह से अटके हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि करीब 80 करोड़ रुपए का कर्ज लेना पड़ा है और जमीनें बेचने की स्थिति बन गई है। गजराज सिंह मोठपुर ने आरोप लगाया कि यह केवल वित्तीय संकट नहीं, बल्कि राज्य सरकार की सोची-समझी चाल है। सरकार कुलगुरुओं की नियुक्ति से लेकर फीस छूट तक हर निर्णय अपने हाथ में रखती है, लेकिन वेतन-पेंशन की जिम्मेदारी निभाने से बच रही है। इससे सार्वजनिक शिक्षा कमजोर हो रही है और निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। सरकार ने तत्काल 500 करोड़ रुपए का विशेष अनुदान जारी नहीं किया तो विश्वविद्यालयों में ताले लगने की नौबत आ जाएगी। रेसटा ने शिक्षा बचाने और निजीकरण रोकने के लिए शिक्षकों से एकजुट होने की अपील की है।

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