रजिस्ट्री से पहले खींची 70 तस्वीरें, लिस्ट डीसी के पास, सभी मामले ब्लैक लिस्ट कॉलोनियों से जुड़े

पंजाब सरकार ने 1 अगस्त 2023 से पूरे राज्य में डिजिटल रजिस्ट्री (ई-रजिस्ट्रेशन सिस्टम) लागू करते समय बड़े दावे किए थे। कहा गया था कि अब रजिस्ट्री पूरी तरह ऑनलाइन, पेपरलेस और बायोमैट्रिक होगी, बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगेगी। लेकिन लुधियाना की मलौद तहसील में सामने आया मामला इन दावों को पूरी तरह झुठलाता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, डिजिटल कैमरे की जगह मोबाइल फोन से फोटो खींचकर रजिस्ट्री करवाने वाले करीब 70 लोगों की सूची डिप्टी कमिश्नर के पास पहुंच चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी रजिस्ट्रियां दुगरी, धांधरा रोड, आलमगीर रोड, पक्खोवाल रोड, संगोवाल और दाद की उन अवैध कॉलोनियों से जुड़ी हैं, जिनकी रजिस्ट्री वेस्ट और पश्चिमी तहसील में होनी चाहिए थी। इन इलाकों में गलाडा की और से रजिस्ट्री पर पहले से रोक लगी हुई थी। सवाल यह है कि जब पूरी प्रक्रिया डिजिटल और ऑनलाइन है, तो फिर मोबाइल से फोटो लेकर रजिस्ट्री के लिए फोटो दो दिन पहले कैसे कर दी जबकि डिजिटल रजिस्ट्री तो मौके पर ही देनी होती है, इससे साफ संकेत मिलते हैं कि सिस्टम के अंदर कहीं न कहीं गंभीर मिलीभगत और गड़बड़ी रही है। बैन की कॉलोनियों पर 200 करोड़ से ज्यादा बकाया इतना ही नहीं, गलाडा द्वारा ब्लैकलिस्ट की गई कॉलोनियां, जिन पर सरकार का करीब 200 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया बताया जा रहा है, उनकी भी रजिस्ट्रियां मलौद तहसील में की गईं। इनमें धांधरा रोड, पखोवाल रोड, सांगोवाल, दाद और आलमगीर रोड की कॉलोनियां शामिल हैं। साथ ही ब्लैकलिस्टेड देव बिल्डर्स की भी तीन रजिस्ट्रियां (वसीका नंबर 851, 852 और 853) दर्ज कर दी गईं, जबकि इन पर पायल के एसडीएम प्रदीप बैंस पहले ही रोक लगा चुके थे। धांधरा रोड स्थित संत सुंदर सिंह नगर कॉलोनी पर गलाडा का करीब 10 करोड़ रुपए बकाया है। इस कॉलोनी को लेकर सभी तहसीलों को नोटिस भेजा जा चुका था, इसके बावजूद इसी कॉलोनी की रजिस्ट्री मलौद तहसील में वसीका नंबर 105/1/831 के तहत कर दी गई। यह सीधे तौर पर नियमों की अवहेलना है। सूत्रों के मुताबिक जुलाई महीने से मलौद में नायब तहसीलदार रघुबीर सिंह की नियुक्ति हुई थी। महीने में यहां औसतन करीब 120 रजिस्ट्रियां होती है। ऐसे में उनके कार्यकाल में अनुमानित 900 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। जोकि विभाग के राडार में हैं। वही डिप्टी कमिश्नर हिमांशू जैन ने बताया कि फाइनेंशियल कमिश्नर रेवेन्यू (एफसीआर) अनुराग वर्मा के पास केस पहुंच चुका है। मामले में विजलेंस भी एक्टिव हो गई है। गौर होकि बुधवार को डीसी हिमांशू जैन ने गड़बड़ी की खबर मिलते ही मलौद तहसील में रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी थी।

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