रणथंभौर का टाइगर पहुंचा कूनो नेशनल पार्क:एमपी में पर्यटकों को दिखा टाइगर, चीतों के लिए खतरा

रणथंभौर टाइगर रिजर्व से करीब तीन-चार महीने पहले निकला एक टाइगर अब चीतों के घर कूनो नेशनल पार्क के टिकटोली गेट क्षेत्र में नजर आया है, जिससे चीतों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। टाइगर की पहचान RBT-2512 के रूप में हुई है। कूनो में एक बाघ की मौजूदगी पिछले कुछ महीनों से मानी जा रही थी, लेकिन यह पहली बार पर्यटकों को भी दिखाई दिया है। रणथम्भौर में बाघों की नई युवा पीढ़ी अब इलाके की तलाश में इधर-उधर भटक रही है। ऐसे में युवा बाघ रणथम्भौर से निकलकर मध्यप्रदेश के जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। दरअसल गुरुवार सुबह टिकटोली गेट से फ्लाइंग कैट सफारी पर निकले पर्यटकों को जंगल में एक टाइगर नजर आया। टाइगर पहले बैठा हुआ था, लेकिन जिप्सी को देखकर चल पड़ा और कुछ ही देर में जंगल में ओझल हो गया। RBT-2512: बाघिन सुल्ताना का शावक वन विभाग के अनुसार कूनो में दिखा टाइगर रणथंभौर की बाघिन टी-107 सुल्ताना का शावक RBT-2512 है। इसकी उम्र करीब ढाई से तीन साल बताई जा रही है। यह टाइगर टेरिटरी की तलाश में अपनी मां से अलग होकर रणथंभौर से निकला था। युवा बाघों का एमपी की ओर बढ़ता रुझान रणथंभौर में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ नई युवा पीढ़ी अब अपनी अलग टेरिटरी की तलाश में रिजर्व से बाहर निकल रही है। इसी वजह से बीते कुछ सालों में कई युवा बाघ रणथंभौर से निकलकर मध्यप्रदेश के जंगलों तक पहुंच चुके हैं। चीतों के लिए क्यों है खतरा वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चीता, टाइगर की तुलना में काफी छोटा और कमजोर शिकारी होता है। टाइगर अपनी टेरिटरी में किसी अन्य मांसाहारी को सहन नहीं करता। ऐसे में कूनो में टाइगर की मौजूदगी चीतों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। पहले भी कूनो पहुंच चुके हैं रणथंभौर के बाघ RBT-2512 रणथंभौर से कूनो पहुंचने वाला पहला टाइगर नहीं है। इससे पहले रणथंभौर का बाघ टी-38 लंबे समय तक कूनो में रहने के बाद साल 2020-21 में लौट गया था। इसके अलावा टी-72, टी-47 (मोनू), टी-132 और टी-136 भी टेरिटरी की तलाश में कूनो क्षेत्र तक पहुंच चुके हैं। चंबल नदी बना प्राकृतिक कॉरिडोर राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर बहने वाली चंबल नदी जंगलों का एक प्राकृतिक कॉरिडोर बनाती है। इसी रास्ते से रणथंभौर के टाइगर कूनो तक पहुंचते हैं, जबकि कूनो के चीते भी रणथंभौर क्षेत्र में देखे जा चुके हैं। केंद्र सरकार इसी क्षेत्र को ‘चीता कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है।

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