रांची में 3 और 4 अगस्त को हिमालयन कॉन्क्लेव 2025 आयोजित होने जा रहा है। जहां 25 से अधिक पर्वतारोही अपनी सफलता की कहानी साझा करेंगे। इसमें वो लोग भी हिस्सा लेंगे, जिन्होंने अपने साहस के दम पर एवरेस्ट पर भी फलत हासिल की और अपने इरादे से उसे भी बौना कर दिया। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 3 अगस्त को शाम 4 बजे से IMF फिल्म फेस्टिवल का आयोजन होगा। जिसमें पर्वतारोहण और जलवायु परिवर्तन पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाई जाएंगी। 4 अगस्त को सुबह 9:30 से शाम 6:30 बजे तक कॉन्क्लेव में प्रेरणादायक सत्र और पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का आयोजन आइडिएट इंस्पायर इग्नाइट फाउंडेशन और झारखंड वन विभाग कर रहा है। जमलिंग टेनजिंग नोर्गे, पद्मश्री प्रेमलता अग्रवाल, छोंज़िन आंगमो होंगे शामिल आयोजकों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य वक्ताओं में जमलिंग टेनजिंग नोर्गे, पद्मश्री प्रेमलता अग्रवाल, छोंज़िन आंगमो और अन्य शामिल हैं। जलवायु संकट, महिला सशक्तिकरण और साहसिक जीवन के अनुभव इस मंच पर साझा किए जाएंगे। यह कार्यक्रम न सिर्फ साहस का उत्सव है, बल्कि झारखंड में पर्यावरणीय जागरूकता और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। ये होंगे प्रमुख वक्ता, बताएंगे अपनी कहानी जमलिंग टेनजिंग : ये प्रसिद्ध पर्वतारोही तेनजिंग नोर्गे के बेटे हैं। जिन्होंने 1996 में अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की। वे IMAX डॉक्यूमेंट्री “Everest” में भी दिखाई दिए हैं। प्रेमलता अग्रवाल : पहली भारतीय महिला जिन्होंने सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी फतह की। 2011 में 48 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट पर चढ़ने वाली सबसे उम्रदराज भारतीय महिला बनी। उन्हें पद्म श्री (2013) और तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (2017) से सम्मानित किया गया है। उमेश ज़िरपे : 45 वर्षों से अधिक अनुभव वाले अनुभवी पर्वतारोही हैं। इन्होंने 50 से अधिक हिमालयी अभियानों का नेतृत्व किया है। उन्होंने 8000 मीटर से ऊंची 8 चोटियों पर चढ़ाई की है, जिनमें एवरेस्ट, कंचनजंघा और अन्नपूर्णा शामिल हैं। देबराज दत्ता : 2016 में एवरेस्ट की चढ़ाई की। 45 से अधिक अभियानों में भाग लिया। जिनमें 26 सफल शिखर सम्मिलित हैं। वे टी ट्रायंगल प्रा. लि. के संस्थापक हैं। 2013 में विश्व की पहली चढ़ाई वाले Mt. Plateau (7287m) के अभियान का नेतृत्व किया। काम्या कार्तिकेयन : मई 2024 में नेपाल की ओर से एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय और दुनिया की दूसरी सबसे युवा लड़की बनीं। उन्होंने 7 समिट्स चैलेंज भी सबसे कम उम्र में पूरा किया है। हेमंत गुप्ता : 2017 में एवरेस्ट फतह किया और झारखंड से यह उपलब्धि हासिल करने वाले सातवें व्यक्ति बने। वे IIT बॉम्बे से स्नातक हैं और टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन से जुड़े हैं। उन्हें “मैन ऑफ स्टील” के नाम से जाना जाता है। रीना भट्टी : मई 2024 में एवरेस्ट, ल्होत्से, एल्ब्रस और किलिमंजारो जैसी कठिन चोटियों पर चढ़ाई कर चुकी हैं। पर्वतारोहण में उन्हें 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अनुराग मालू : Mt. Annapurna पर 72 घंटे तक एक गहरी दरार में जीवित रहने के कारण “The Miracle Man” के नाम से जाने जाते हैं। वे “The Voice of Glaciers Foundation” के संस्थापक हैं और 60 से अधिक देशों में नवाचार और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। डॉ. मुराद लाला : मई 2013 में एवरेस्ट फतह करने वाले भारत के पहले नागरिक डॉक्टर बने। वे PD हिंदुजा अस्पताल, मुंबई में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष हैं और दक्षिणी ध्रुव तक स्कीइंग करने वाले कुछ चुनिंदा भारतीयों में शामिल हैं। शरद कुलकर्णी : 60 साल 6 महीने की उम्र में एवरेस्ट फतह कर सबसे उम्रदराज भारतीय बने। उन्होंने 2014 से 2023 के बीच सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियां फतह कीं और अपनी पत्नी के साथ ऑस्ट्रेलिया की 10 ऊंची चोटियां भी चढ़ीं। कर्नल प्रीतिंदर सिंह चौहान : सेना में 25 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले अधिकारी हैं। उन्होंने उच्च ऊंचाई पर युद्ध अभियानों का नेतृत्व किया है। आर्मी एडवेंचर विंग के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। अनिंद्य मुखर्जी : उन्होंने ग्रीनलैंड, आइसलैंड, आल्प्स, एंडीज, चीन और अफ्रीका के पर्वत क्षेत्रों में अन्वेषण किया है। साथ ही भारतीय हिमालय की अनदेखी चोटियों और आज़ाद हिंद फौज की पदयात्रा को दोहराया है। अनिमिष वर्मा : 2021 में दो बार एवरेस्ट फतह किया और सिर्फ 91 दिनों में सातों ज्वालामुखीय चोटियों को चढ़ने का रिकॉर्ड बनाया। वे अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट्स में स्वर्ण पदक विजेता भी हैं। भूषण हर्षे : 2013 में एवरेस्ट, 2019 में कंचनजंघा और 2021 में अन्नपूर्णा फतह की। वे 20 वर्षों से पर्वतारोहण में सक्रिय हैं और वरिष्ठ प्रशिक्षक के रूप में कार्य करते हैं। पी. विश्वनाथ कार्तिकेयन : मात्र 16 वर्ष की उम्र में सातों समिट्स फतह कर सबसे कम उम्र के भारतीय बने। उन्होंने मई 2025 में एवरेस्ट फतह किया। मलय मुखर्जी : 2016 में एक घंटे के भीतर दो बार एवरेस्ट फतह करने का दुर्लभ कारनामा किया। उन्हें 2015 में बंगाल का सर्वश्रेष्ठ पर्वतारोही घोषित किया गया। अस्मिता दोरजी : बचेंद्री पाल की शिष्या हैं। मई 2022 में एवरेस्ट फतह किया। वे टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन में वरिष्ठ प्रशिक्षक हैं। ज्योति रातरे : 2024 में 55 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट फतह कर सबसे उम्रदराज भारतीय महिला बनीं। वे प्रेरक वक्ता, पर्यावरणविद् और शहरी महिलाओं की सशक्त आवाज़ हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल पूजा नौटियाल : मई 2022 में एवरेस्ट फतह किया। वे सेना में 25 वर्षों से सेवा दे रही हैं और कुन, अमा डब्लम, लबुचे जैसी ऊंचाइयों को भी फतह कर चुकी हैं। अनुजा वैद्य : मई 2019 में अपनी बहन अदिति के साथ एवरेस्ट फतह करने वाली पहली गुजराती बहनें बनीं। उन्होंने सभी सात समिट्स चढ़े हैं। केवल हिरेन कक्का : 2019 में एवरेस्ट फतह किया और 8000 मीटर से ऊंची 8 चोटियां बिना सहायता और शेरपा के फतह करने का दुर्लभ कारनामा किया। सत्यदीप गुप्ता : मई 2023 में एवरेस्ट और ल्होत्से को दो बार सिर्फ 6 दिन 7 घंटे 31 मिनट में फतह करने वाले पहले व्यक्ति बने। सत्यरूप सिद्धांत : सातों महाद्वीपों और सातों ज्वालामुखीय चोटियों को फतह करने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने यह कीर्तिमान 35 वर्ष की उम्र में हासिल किया। रूद्र प्रसाद हलदर : मई 2021 में एवरेस्ट फतह किया। वे 26 वर्षों में 30 पर्वतारोहण अभियानों में भाग ले चुके हैं, जिनमें से 19 सफल रहे हैं। अदिति वैद्य : अनुजा वैद्य की बहन हैं। उन्होंने 2019 में एवरेस्ट फतह किया। वे 7 वर्ष की उम्र से पर्वतारोहण में सक्रिय हैं। दावा ताशी शेरपा : नेपाल के पहले अंतरराष्ट्रीय प्रमाणित माउंटेन लीडर हैं। उन्होंने एवरेस्ट पर कई बार चढ़ाई की है। 2014 की हिमस्खलन त्रासदी के जीवित बचे लोगों में शामिल हैं। छोंज़िन आंगमो : 2024 में एवरेस्ट फतह करने वाली पहली दृष्टिहीन भारतीय महिला बनीं। उन्होंने 8848.86 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक तय की।


