यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर मंगलवार को रांची समेत पूरे देश में बैंककर्मी एकदिवसीय हड़ताल पर रहे। रांची में लगभग सभी सरकारी और निजी बैंक बंद रहे। इस हड़ताल को जोड़कर लगातार चार दिन तक बैंकिंग सेवाएं ठप रहीं, जिससे एटीएम और काउंटर सेवाओं में भी बाधा आई। एटीएम में कैश की कमी या फुल होने के कारण यह समस्या बनी रही। हालांकि, प्राइवेट कैश मैनेजमेंट एजेंसियों ने एटीएम में नकदी डाली, लेकिन कई ग्राहकों ने बताया कि उन्हें नकदी नहीं मिल सकी। बैंकों के लगातार बंद रहने से दिहाड़ी मजदूरों, छोटे कारोबारियों, पेंशनधारकों और आम जनता को खास परेशानी झेलनी पड़ी। इधर, मेन रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस (प्रधान टावर) के सामने बैंककर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। हड़ताल और धरने में 500 से अधिक बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बैंककर्मी लंबे समय से अत्यधिक कार्य दबाव में हैं और अन्य वित्तीय संस्थानों की तरह पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू होने के बावजूद उन्हें इससे वंचित रखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते हैं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। एसबीआई प्रशासनिक कार्यालय और मुख्य शाखा के सामने भी बैंककर्मियों ने धरना देकर अपनी आवाज बुलंद की। हड़ताल से रांची में करीब तीन हजार करोड़ व पूरे राज्य में 15 हजार करोड़ रु. का कारोबार प्रभावित होने का दावा किया गया है। कारोबारी अमित शर्मा ने कहा कि सोमवार को कैश जमा–निकासी, चेक क्लियरेंस नहीं हो सका। इससे वे जरूरी ट्रांजेक्शन नहीं कर पाए। पहले से ही तीन दिन बैंक बंद थे। ऐसे में मंगलवार को बैंक बंद करना जरूरी नहीं था। जेसीपीडीए के अध्यक्ष संजय अखौरी ने कहा कि बैंक वालों को हड़ताल लंबी छुटि्टयों के दूसरे दिन नहीं करनी चाहिए। ट्रांजेक्शन नहीं होने से व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। पैसे ट्रांसफर नहीं हो सके। चेक क्लियरेंस में भी दिक्कतें आईं। इससे व्यापार काफी प्रभावित हुआ। व्यापारी अमित कुमार ने कहा कि सोमवार को लालपुर कोकर क्षेत्र के एटीएम में पैसे नहीं थे। बैंक बंद होने के कारण हम बैंक से भी पैसे नहीं निकाल सके। अपर बाजार कारोबारी कमल छापड़िया ने कहा कि तीन दिन लगातार बंद रहने के बाद आज बैंक खुलने चाहिए थे। हमलोंगों का पूरा कारोबार आज भी बैठ गया। कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं हो पाया। बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव प्रकाश उरांव ने बताया कि चार दिनों की बंदी से रांची में मौजूद करीब 1500 एटीएम में से ज्यादातर एटीएम प्रभावित रहे। सोमवार को इनमें से आधे से ज्यादा एटीएम में पैसा नहीं था। लोग ना ही पैसा निकाल पाए और ना ही पैसे जमा कर पाए। क्योंकि एटीएम फुल हो गए थे ओर बैंक पिछले चार दिन से बंद थे। उन्होंने कहा कि हड़ताल से रांची जिला में करीब तीन हजार करोड़ रुपए का व्यापार प्रभावित हुआ। रांची में 4000 से ज्यादा बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे। सबसे ज्यादा चेक क्लियरेंस प्रभावित हुआ। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों पर अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने से बैंक कर्मियों में गहरी नाराजगी है। फोरम ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसके बावजूद कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। सरकार और बैंक प्रबंधन से सकारात्मक संवाद और शीघ्र समाधान की मांग की है। बयान में यह भी संकेत दिया गया है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आगे सामूहिक आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।


