राज्यपाल ने स्टूडेंट्स को दी अनुशासन की नसीहत:कहा; उदयपुर में डिग्री लेकर स्टूडेंट्स हॉल के बाहर गए और वापस नहीं लौटे

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के दसवें दीक्षांत समारोह में बुधवार को राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने विद्यार्थियों की सभ्यता, अनुशासन और राष्ट्रबोध को लेकर सख्त लेकिन स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल कर लेना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, छात्रों को अपने आचरण और व्यवहार में भी सभ्यता दिखानी चाहिए। उन्होंने स्टूडेंट्स को युनिफॉर्म में आने और हर रोज शेविंग करने की सलाह देते हुए कहा कि शिष्टता दिखानी चाहिए। राज्यपाल ने मंच से कहा कि कई बार दीक्षांत समारोह जैसे गरिमामय कार्यक्रमों में छात्र डिग्री लेने के बाद सभागार छोड़ देते हैं, जो सही परंपरा नहीं है। उन्होंने बताया कि उदयपुर की सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में डिग्रीधारी छात्र बाहर चले गए और वापस नहीं लौटे, जिस पर उन्होंने कुलपति के समक्ष नाराजगी भी जताई थी। इसके बाद दूसरे युनिवर्सिटी के कार्यक्रम में स्टूडेंट्स अंत तक बैठे रहे। ऐसे कार्यक्रमों में आपको गरिमा दिखानी चाहिए। हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि अच्छा नागरिक बनना भी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई की गंभीरता कम हो रही है। छात्रों को ईमानदारी से पढ़ना चाहिए और जीवन में कभी भ्रष्टाचार का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। पाठ्यपुस्तकों में सभ्यता का पाठ जोड़ने की जरूरत राज्यपाल ने सुझाव दिया कि स्कूली और कॉलेज स्तर की पाठ्यपुस्तकों में ऐसा पाठ शामिल किया जाना चाहिए, जिससे छात्रों को यह समझाया जा सके कि सभ्यता क्या होती है और समाज में कैसा व्यवहार अपेक्षित है। वंदेमातरम पर अंग्रेजों का दोहरा रवैया बताया राज्यपाल ने राष्ट्रभक्ति से जुड़े ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय वंदेमातरम कहने पर अंग्रेज भारतीयों को मारते थे। लेकिन जब भारतीय सैनिक अंग्रेजों के लिए लड़कर उनके राष्ट्र को जिताने का काम करते थे, तब वही अंग्रेज वंदेमातरम कहते थे। उन्होंने कहा कि इतिहास से हमें आत्मसम्मान और देशप्रेम का पाठ सीखना चाहिए। महाराजा गंगा सिंह की दूरदृष्टि को किया याद दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने महाराजा गंगा सिंह के योगदान को भी विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि महाराजा गंगा सिंह ने गंग नहर लाकर बीकानेर के लिए दूरदृष्टि वाला ऐतिहासिक कार्य किया। 1919 में संधि कर 1920 में सतलुज नदी का पानी बीकानेर तक लाया गया। उन्होंने बताया कि महाराजा गंगा सिंह ने 272 मील लंबी नहर का निर्माण करवाया, जो उस समय विश्व का एक अनूठा उदाहरण था। दुनिया में यह पहला अवसर था जब इतनी बड़ी नहर बनाई गई, जिसने मरुस्थलीय बीकानेर को खेती और विकास के नए रास्ते दिए।

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