भास्कर संवाददाता | खरगोन निमाड़ की खुशहाली और नवग्रह शांति की कामना को लेकर निकाली जाने वाली नवग्रह पंचक्रोशी पदयात्रा की शुरुआत सोमवार से होगी। यात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का आगमन रविवार शाम से ही शुरू हो गया। रात 8 बजे तक करीब ढाई हजार यात्री शहर पहुंच चुके थे। श्रद्धालुओं ने नवग्रह मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि विश्राम किया। सोमवार सुबह यात्री भगवान नवग्रह के दर्शन व पूजन-अर्चन के बाद सुबह 8 बजे यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे। यह यात्रा शैव संप्रदाय के तत्वावधान में संत पूर्णानंद महाराज व बोंदरु बाबा की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। नवग्रह पंचकोशी पदयात्रा समिति के अनुसार सोमवार को नवग्रह मंदिर में ओंकार ध्वज पूजन, मां नर्मदा व नवग्रहों के विधिवत पूजन के बाद यात्रा रवाना होगी। इस वर्ष यात्रा के ध्वजवाहक मेहरजा के नर्मदे हर बाबा रहेंगे। पंचक्रोशी पदयात्री पांच दिनों में 12 गांवों से भ्रमण कर 75 किमी की पदयात्रा करेंगे। 19 दिसंबर को पुनः नवग्रह मंदिर पहुंचकर यात्रा का समापन होगा। यात्रा में 5 हजार भक्तों आने का अनुमान है। 2008 से शुरू हुई यात्रा नवग्रह पंचक्रोशी यात्रा अन्य धार्मिक यात्राओं से अलग है। यह एकमात्र पंचक्रोशी यात्रा है, जो नर्मदा तट से नहीं गुजरती। इसकी शुरुआत वर्ष 2008 में डॉ. रवींद्र भारती चौरे की प्रेरणा से हुई थी। डॉ. भारती ने 1975 में ओंकारेश्वर से पहली पंचक्रोशी यात्राओं की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में 25 नर्मदा पंचक्रोशी यात्राएं प्रारंभ कीं, जो अब भी निरंतर जारी हैं। यात्रा के दौरान ही वे पुनासा में ब्रह्मलीन हुए थे।


