रामचरित मानस भाषा, संवाद व दर्शन का अद्‍भुत ग्रंथ है: जगदीश देशमुख

भास्कर न्यूज | बालोद रामचरितमानस भाषा, संवाद और दर्शन का अद्भुत ग्रंथ है। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने इसमें ज्ञान, भक्ति, कर्म और मीमांसा के साथ-साथ भाषा और संवाद का अनुपम समन्वय किया है। यह विचार जिले के वरिष्ठ साहित्यकार एवं तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश देशमुख ने ग्राम दरबारी नवागांव में आयोजित त्रिदिवसीय मानस महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। देशमुख ने कहा कि तुलसीदास ने मानस की वंदना करते हुए वर्णों और शब्दों से निर्मित काव्य छंदों के रस-माधुर्य को ज्ञान-भक्ति की देवी सरस्वती तथा बुद्धि-विवेक के देवता गणेश के रूप में प्रतिपादित किया है, जो सार्वभौमिक है। उन्होंने रामचरित मानस के माध्यम से राम और रावण के चरित्र का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान राम अपने समग्र ज्ञान को गुरु कृपा मानते थे, जिससे उनके जीवन में विनम्रता आई, जबकि रावण अपने ज्ञान को स्वयं का पुरुषार्थ मानता था, इसलिए उसमें अहंकार था। यही राम और रावण के चरित्र का मूल अंतर है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सरपंच गिरीश निर्मलकर ने रामचरित मानस से सामाजिक समरसता और विकास की प्रेरणा लेने की बात कही। विशेष अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक केआर नेताम ने अपने शिक्षकीय जीवन के अनुभव साझा करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के कर्तव्यों को रेखांकित किया। कार्यक्रम को पंडित जगत्येश दास वैष्णव ने भी संबोधित किया। त्रिदिवसीय मानस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की ख्यातिप्राप्त मानस मंडलियों ने प्रस्तुति दी। आयोजन में सीताराम मानस मंडली एवं ग्रामवासियों का योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन सोहन खरे एवं डेमन भोला साहू ने किया।

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